सुधीर गोरे

एक वक्त था जब "बीमारू राज्य" के ठप्पे से बाहर निकलने की कोशिश में मध्यप्रदेश को दशकों लग गए थे। लेकिन 2024 में तस्वीर बदली है। मार्च से दिसंबर 2024 के बीच महज दस महीनों में प्रदेश को देश-दुनिया के निवेशकों से ₹3.85 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। यह आंकड़ा अपने आप में एक बड़ा संकेत है मध्यप्रदेश अब केवल कृषि प्रधान राज्य नहीं रहा, वह औद्योगिक गलियारे की नई धुरी बनने की राह पर है।

हर महीने औसतन ₹38,500 करोड़ के निवेश प्रस्ताव आना कोई छोटी बात नहीं। विशेषज्ञ इसे प्रदेश सरकार की नीतिगत स्पष्टता, प्रशासनिक तत्परता और राजनीतिक इच्छाशक्ति का मिला-जुला परिणाम मान रहे हैं।

रीजनल कॉन्क्लेव एक नई सोच, एक नया फॉर्मूला

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पदभार संभालते ही पारंपरिक ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के ढांचे से हटकर एक अलग रास्ता अपनाया रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का। इसके पीछे सोच यह थी कि निवेश केवल राजधानी-केंद्रित न रहे, बल्कि प्रदेश के हर हिस्से तक पहुंचे।

मार्च से दिसंबर 2024 के बीच छह संभागों में ये कॉन्क्लेव आयोजित हुए:

  • उज्जैन — 1 मार्च 2024 को पहला कॉन्क्लेव, ₹1 लाख करोड़ के प्रस्ताव
  • जबलपुरमहाकोशल क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों पर फोकस
  • ग्वालियरचंबल-विंध्य क्षेत्र के लिए विशेष क्षमता
  • सागरबुंदेलखंड में ₹6,600 करोड़ के प्रस्ताव, NH48 के किनारे 240 एकड़ भूमि आरक्षित
  • रीवाडालमिया, पतंजलि सहित बड़े समूहों ने ₹31,000 करोड़ निवेश की योजना बनाई
  • नर्मदापुरम — ₹31,800 करोड़ के प्रस्ताव

📌 HIGHLIGHTER: "6 संभागों में ₹2.07 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव एक साल में।"

इन छह संभागों की कॉन्क्लेव से अकेले ₹2.07 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव आए। शेष प्रस्ताव देश-विदेश के रोड शो और द्विपक्षीय बैठकों से जुटाए गए।

देश-दुनिया में प्रचार रोड शो से विदेश यात्रा तक

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निवेश आकर्षित करने के लिए प्रदेश की सीमाओं से बाहर निकलकर सक्रिय प्रचार किया। देश के प्रमुख औद्योगिक शहरों मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता और कोयंबटूर में रोड शो आयोजित किए गए, जिनसे ₹1 लाख करोड़ के प्रस्ताव मिले।

इसके अलावा नवंबर 2024 में इंग्लैंड और जर्मनी की विदेश यात्रा में ₹78,000 करोड़ के निवेश के वादे सामने आए। मुख्यमंत्री ने ब्रिटेन, जर्मनी और जापान में अंतरराष्ट्रीय निवेश रोड शो भी आयोजित किए, जिसने वैश्विक कंपनियों को प्रदेश में निवेश के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया।

प्रशासनिक सुधार जटिलता खत्म, जिम्मेदारी स्पष्ट

निवेशकों को सबसे बड़ी परेशानी अनुमतियों के चक्कर में होती थी। सिंगल विंडो सिस्टम जो कागजों पर "सिंगल" था, व्यवहार में कई दरवाजों वाला भूलभुलैया बन चुका था। मुख्यमंत्री ने इस व्यवस्था को बदलते हुए जमीन आवंटन से लेकर सभी अनुमतियों की जिम्मेदारी सीधे जिला कलेक्टरों को सौंप दी।

इस बदलाव के नतीजे सामने आए:

  • निवेशकों को जमीन और अनुमतियां तेज गति से मिलने लगीं
  • उद्योगपतियों ने माना कि प्रदेश में तय समय-सीमा में सभी प्रस्तावों को मंजूरी दी जा रही है और पर्याप्त बिजली, पानी व अधोसंरचना की सुविधाएं उपलब्ध हैं
  • निवेशकों का भरोसा बढ़ा और कई बड़े समूहों ने मध्यप्रदेश को पहली प्राथमिकता दी

किन सेक्टर में दिखी सबसे ज्यादा रुचि

निवेश के प्रस्ताव किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहे। प्रदेश की विविधता ने विभिन्न सेक्टरों में निवेशकों को आकर्षित किया:

सेक्टर

प्रमुख निवेशक / प्रस्ताव

ऊर्जा (सौर एवं ताप)

टोरेंट पावर, अडानी ग्रुप

सीमेंट एवं इस्पात

डालमिया, NH48 क्षेत्र में नए प्लांट

खाद्य प्रसंस्करण

पतंजलि सहित अन्य समूह

पर्यटन एवं आतिथ्य

PPP मोड पर विकास

आईटी एवं अवसंरचना

उज्जैन, जबलपुर कॉरिडोर

📌 "₹3.85 लाख करोड़ का निवेश — 3.69 लाख नौजवानों को रोजगार की उम्मीद।"

रोजगार असली परीक्षा आगे है

निवेश प्रस्ताव आना एक बात है, उनका जमीन पर उतरना बिल्कुल अलग। सरकार का अनुमान है कि यदि ये प्रस्ताव धरातल पर उतरते हैं, तो प्रदेश के 3.69 लाख युवाओं को सीधा रोजगार मिलेगा। सागर में इसके संकेत भी दिखने लगे हैं जहां कॉन्क्लेव के बाद उद्योग इकाइयां आकार लेने लगी हैं।

अर्थशास्त्री और उद्योग विशेषज्ञ यह भी रेखांकित करते हैं कि निवेश प्रस्ताव और वास्तविक निवेश के बीच की खाई को पाटना ही असली चुनौती है। समयबद्ध क्रियान्वयन, पारदर्शी भूमि आवंटन और कुशल मानव संसाधन ये तीन स्तंभ तय करेंगे कि मध्यप्रदेश की यह औद्योगिक महत्वाकांक्षा कितनी सफल होती है।

 

GIS 2025 — अगली बड़ी छलांग की तैयारी

इन्हीं प्रयासों की पृष्ठभूमि में फरवरी 2025 में भोपाल में पहली बार ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) का आयोजन प्रस्तावित है। इस समिट में 60 देशों के उद्यमियों को आमंत्रित किया गया है, जिसमें 13 राजदूत, छह उच्चायुक्त और कई महावाणिज्य दूत भाग लेंगे। सरकार ने 2025 को "उद्योग वर्ष" घोषित करने की भी योजना बनाई है।

दस महीनों की यह यात्रा बताती है कि मध्यप्रदेश ने निवेश आकर्षण को महज एक आयोजन नहीं, बल्कि एक सतत प्रक्रिया बना दिया है। अब देखना यह है कि संख्याओं की यह चमक कारखानों चिमनियों में धुएं और युवाओं के हाथों में काम बनकर उतरती है या नहीं यही मध्यप्रदेश की असली अग्निपरीक्षा होगी।