अमृतपाल सिंह की नई पार्टी का गठन: पंजाब की अकाली राजनीति में नई चुनौती
चंडीगढ़। असम की डिब्रूगढ़ जेल में रहते हुए अमृतपाल सिंह ने नई पार्टी का ऐलान कर दिया है। नई पार्टी का ऐलान मंगलवार को मुक्तसर के माघी मेले में किया गया है। अमृतपाल सिंह की नई पार्टी का नाम अकाली दल (वारिस पंजाब दे) रखा गया है।
जेल में बंद अमृतपाल सिंह की नई पार्टी का ऐलान जहां माघी मेले में किया गया, वहीं बताया गया कि अमृतपाल को नई पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष नामित किया गया है। इस घोषणा को पंजाब की राजनीति, विशेषकर अकाली राजनीति में बड़े बदलाव की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। इसके साथ ही माघी मेले के दौरान 15 सूत्रीय प्रस्ताव पारित किया गया। इसमें अस्थायी समिति बनाई गई और पार्टी का संचालन अमृतपाल के पिता तरसेम सिंह और अन्य वरिष्ठ नेताओं की एक समिति करेगी। सात सदस्यों की एक समिति पार्टी का सदस्यता अभियान चलाएगी।
बताया जा रहा है कि पंजाब में तीन अकाली दल हो गए हैं, इनमें कट्टरपंथ और लिबरल विचारधाराओं का टकराव बराबर बना हुआ है। इसके साथ ही अकाली राजनीति अब तीन दलों में विभाजित हो गई है। शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) है जो पंजाब में लिबरल विचारधारा का प्रतिनिधित्व करता है और कई बार सरकार चला चुका है। वहीं शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) है जो सिमरनजीत सिंह मान के नेतृत्व में कट्टरपंथी विचारधारा का समर्थक है। इन दो के अतिरिक्त अब तीसरा अकाली दल का भी आगाज हो गया है। अकाली दल (वारिस पंजाब दे) असल में अमृतपाल सिंह की नई पार्टी है, जो पंथक विचारधारा को लेकर प्रतिबद्ध है। विचारकों की मानें तो अमृतपाल की नई पार्टी शिरोमणि अकाली दल के परंपरागत पंथक वोटबैंक को चुनौती दे सकती है। दरअसल अकाली दल (वारिस पंजाब दे) ने अपनी विचारधारा को पंजाब और पंथ की रक्षा के रूप में प्रस्तुत किया है। बहरहाल अमृतपाल की पार्टी गठन से पंजाब की राजनीति में एक नया समीकरण उभरा है।
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