संभल में पुराने ऐतिहासिक मंदिरों का दर्शन करने पहुंचा 30 से 35 श्रद्धालुओं का जत्था
संभल । राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की ओर गाजियाबाद हरनंदी महानगर से श्रद्धालुओं का जत्था महानगर प्रचारक ललित शंकर के नेतृत्व में निजी वाहनों से संभल पहुंचा। जहां जत्थे में करीब 30 से 35 श्रद्धालु शामिल थे।
नगर में पहुंचने पर श्रद्धालुओं का सबसे पहले भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा स्वागत किया गया, जिसके बाद सभी एकत्र होकर भागीरथी तीर्थ पर पहुंचे। यहां पर दर्शन कर वे खग्गू सराय स्थित प्राचीन मंदिर और फिर वहां से श्रीकल्कि मंदिर पहुंचे और भगवान कल्कि के दर्शन किए। बताया गया कि श्रद्धालुओं का जत्थे में शामिल श्रद्धालु संभल कल्कि नगर के प्रसिद्ध व प्राचीन मंदिरों के दर्शन करने के लिए पहुंचे है, जिससे यहां के पौराणिक व ऐतिहासिक महत्व के बारे में और अधिक जानकारी मिल सके। साथ ही कहा कि वह क्षेत्र के अन्य तीर्थों का भ्रमण की उनके दर्शन करने वाले है।
वहीं खग्गू सराय में स्थित परियों वाला मंदिर की भूमि पर हो रखे कब्जे को लेकर प्रशासन ने प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसमें आसपास बने मकान स्वामियों से कागज मांगे गए है। वहीं दूसरी ओर पालिका प्रशासन विभाग भी अपनी तरफ से दस्तावेज को तलाश कर रहा है। नगर के खग्गू सराय में परियों वाला मंदिर मौजूद हैं। इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां पर पूर्व परियां आती थी। जोकि मंदिर परिसर में बने कूप पर पानी पीने के साथ वहां पर नृत्य भी करती थीं, लेकिन जैसे−जैसे समय बीता मंदिर और उसकी संपत्ति का स्वरूप भी बदल गया।
मंदिर के पुजारी सचिन जोशी ने बताया कि इस मंदिर पर पूर्व से ही उनके परिवार के लोग पूजा सेवा करते आ रहे हैं। सचिन के चाचा बबलू जोशी ने बताया कि पहले उनके परिवार मंदिर और उसके आसपास रहते थे, लेकिन 1978 के बाद वह इस जगह को छोड़कर दूसरे मुहल्लों में रहने लगे। जबकि तब मंदिर के पास में उसकी धर्मशाला भी थी।
जब हमारे परिवार यहां से चला गया तब उस पर भी कब्जा कर लिया गया। उन्होंने कहा कि उस समय वह छोटे थे और मंदिर पर उनके पिता रामगोपाल व बड़े भाई रामौतार जोशी सेवा करते थे। जहां भाई की मृत्यु के बाद उनका बेटा सचिन अब पूजा सेवा कर रहा है, लेकिन अभी भी हमारा परिवार हातिम सराय नई बस्ती में रह रहा है।
बबलू जोशी ने बताया कि मंदिर के सामने खाली मैदान में तब होलिका दहन होता था। इस प्रथा को हम आज भी वहां पर जैसे तैसे सहयोग से निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब जिला प्रशासन की ओर से मंदिर धर्मशाला की भूमि को चिंहित कर उसपर से अवैध कब्जा हटने की तैयारी चल रही है, जिसके लिए अधिकारी दस्तावेजों को खंगाल रहे हैं, जिससे मंदिर की सही संपत्ति के बारे में पता लग सकेगा।
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