जम्मू-कश्मीर में जमात-ए-इस्लामी ने राजनीति में कदम रखा, नई पार्टी का गठन
जम्मू-कश्मीर में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के बाद प्रतिबंधित जम्मू-कश्मीर जमात-ए-इस्लामी अब आधिकारिक तौर पर राजनीति में उतर गई है. इसके साथ ही जमात-ए-इस्लामी ने एक नई राजनीतिक पार्टी भी शुरू की है. जो संगठन के मुताबिक क्षेत्र के विकास और शांति की दिशा में काम करेगी. नई पार्टी का नाम जम्मू कश्मीर जस्टिस एंड डेवलपमेंट फ्रंट रखा गया है. फ्रंट की ओर से जारी बयान के मुताबिक अपनी पहल के तहत पार्टी कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास और मोर्चे की नई समितियों के गठन के लिए प्रतिबद्ध है. जो लोगों के कल्याण और हितों के लिए सक्रिय रूप से काम करेगी. इस फ्रंट द्वारा आधिकारिक रूप से शुरू किए गए पहले कार्यक्रम के दौरान अध्यक्ष शमीम अहमद थोकर, महासचिव सियार रेशी और सलाहकार मुहम्मद अहसान लोन समेत मोर्चे के प्रमुख नेता मौजूद थे.
फ्रंट सद्भाव को बढ़ावा देने में निभाएंगी सक्रिय भूमिका
सभा को संबोधित करते हुए फ्रंट के वरिष्ठ सदस्यों ने एक शांतिपूर्ण और प्रगतिशील जम्मू-कश्मीर के अपने दृष्टिकोण पर जोर दिया वहीं, जारी बयान के अनुसार, नवगठित राजनीतिक दल एक समावेशी मंच बनाने का प्रयास करता है, जहां लोगों की आवाज सुनी जाए और उनकी चिंताओं को प्रभावी ढंग से संबोधित किया जाए. फ्रंट के नेतृत्व ने आश्वासन दिया है कि पार्टी की नई समितियां जनता की शिकायतों को हल करने, सद्भाव को बढ़ावा देने और क्षेत्र में समग्र विकास सुनिश्चित करने में सक्रिय भूमिका निभाएंगी.
यह एक एक स्वागत योग्य कदम है- PDP
वहीं, जम्मू-कश्मीर में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी जम्मू-कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता इकबाल त्रंब ने कहा कि यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस उभरते राजनीतिक दल, जिसकी घोषणा कल जमात के कुछ पूर्व सदस्यों ने की, इसको जमात का समर्थन है या नहीं? त्रंब ने कहा, लोकतंत्र में किसी भी राजनीतिक दल का उभरना एक स्वागत योग्य कदम है. जमात पहले भी करीब 35 साल पहले चुनावों में भाग लेती थी. लेकिन उसके बाद उन्होंने भाग नहीं लिया. यह अच्छी बात है क्योंकि ऐसी चीजें लोकतंत्र के लिए फायदेमंद हैं.
जनता फैसला करेगी स्वीकार करेंगे या नहीं- रफी मीर
जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेता रफी मीर कहते हैं कि जमात कभी एक राजनीतिक पार्टी थी. रफी मीर कहते हैं, वे पहले भी राजनीति में रहे हैं और फिर बहिष्कार की राजनीति में आ गए. अगर वे फिर से लोगों के सामने आते हैं, तो वे उनकी सेवा करना चाहते हैं. यह तो समय ही बताएगा कि वे कैसे आएंगे और लोग कैसे जवाब देंगे. वे उन्हें स्वीकार करेंगे या अस्वीकार करेंगे. यह लोगों का फैसला होगा.
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