काशी में चिता भस्म की होली को लेकर विवाद, विद्वत परिषद ने शुद्धि अनुष्ठान का किया ऐलान
चिता भस्म की होली को लेकर अब नया विवाद सामने आया है. काशी विद्वत कर्मकांड परिषद ने इसे आशास्त्रीय बताते हुए मसाने की होली खेलने वालों की शुद्धि के लिए अनुष्ठान करने का फैसला लिया है. काशी विद्वत कर्मकांड परिषद के अध्यक्ष और काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के पूर्व अध्यक्ष आचार्य पंडित अशोक द्विवेदी ने बताया कि बिना वजह श्मशान जाने वालों पर दस से तीस दिनों तक का सूतक लगता है.
उन्होंने आगे कहा कि कूर्म पुराण में ये स्पष्ट लिखा हुआ है कि लोभ या मनोरंजन के लिए श्मशान जाने वालों पर ये सूतक लगता है. गरुण पुराण, विष्णु धर्मसूत्र, याज्ञवल्क्य स्मृति और काशी खंड में भी इसपर विस्तार से लिखा गया है. काशी विद्वत परिषद ने भी यही बात दोहराई है कि चिताओं का अपमान हुआ है. शुद्धि के लिए पिंडदान करने का विधान है. ये 21 मार्च को मणिकर्णिका तीर्थ पर शास्त्रोक्त विधि से पिंडदान कराया जाएगा. मसान की होली खेलते समय चिताओं की राख को रौंदा गया. उनका अपमान किया गया और उनकी राख उड़ाई गई. सभी मृत आत्माओं से प्रार्थना कर क्षमा मांगी जाएगी.
विरोध के बाद चिता भस्म की होली
काशी तीर्थ पुरोहित, मणिकर्णिका तीर्थ पुरोहित, काशी विद्वत परिषद, काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व न्यासी, काशी विद्वत कर्मकांड परिषद, अखिल भारतीय विद्वत परिषद इन सभी संस्थाओं और विद्वत समाज के विरोध के बावजूद 10 और 11 मार्च को चिता भस्म की होली खेली गई. 10 मार्च को हरिश्चंद्र घाट जबकि 11 मार्च को मणिकर्णिका घाट पर चिता भस्म की होली खेली गई.
इसको लेकर भी विरोध जताया गया है. यह तय हुआ है कि अधार्मिक आयोजनों को बंद करने के लिए विद्वत समाज अब आंदोलन शुरू करेंगे. श्मशान में डीजे, नाच गाना और हुल्लड़ बाजी बंद कराने के लिए शासन से मदद ली जाएगी. काशी विद्वत कर्मकांड परिषद के अध्यक्ष और काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के पूर्व अध्यक्ष आचार्य पंडित अशोक द्विवेदी ने ये सभी बातें कहीं हैं.
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