अमेरिकी उपराष्ट्रपति के बयान से 30 लाख ग्रीन कार्ड धारक भारतीयों को झटका, स्थायी निवास की गारंटी नहीं
डोनाल्ड ट्रंप के कुर्सी संभालने के बाद से ही अमेरिका में कई बदलाव हो रहे हैं. पहले प्रवासियों को लेकर अमेरिका ने सख्ती दिखाई अब गाज ग्रीन कार्ड होल्डर पर गिरने वाली है. बता दें कि ग्रीन कार्ड होल्ड कोई अवैध प्रवासी नहीं है, जिनको युही ट्रंप निकाल सकते हैं. लेकिन उनके उप राष्ट्रपति ने ऐसी बात कही है कि इससे करीब 50 हजार भारतीय प्रभावित हो सकते हैं.
स्थायी शब्द से मूर्ख मत बनिए
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ग्रीन कार्ड धारकों को संदेश दिया कि स्थायी शब्द से मूर्ख मत बनिए. गुरुवार रात ने कहा, "ग्रीन कार्ड धारक को अमेरिका में रहने का अनिश्चितकालीन अधिकार नहीं है." उन्होंने आगे कहा, "यह मूल रूप से अभिव्यक्ति की आजादी के बारे में नहीं है. यह राष्ट्रीय सुरक्षा के बारे में है. लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि हम एक अमेरिकी नागरिक के रूप में, यह तय करते हैं कि हमारे राष्ट्रीय समुदाय में किसे शामिल किया जाए."
30 लाख भारतीयों के लिए बुरी खबर
अमेरिका में करीब 12.7 मिलियन ग्रीन कार्ड होल्डर हैं और इसमें भारतीय करीब 2.8 मिलियन हैं. भारतीय मूल के लोग अमेरिका में ग्रीन कार्ड लेना वाला दूसरा सबसे बड़ा समुदाय है. 2024 में ही करीब 50 हजार भारतीयों ने ग्रीन कार्ड हासिल किया था.
क्या होता है ग्रीन कार्ड?
ग्रीन कार्ड जिसे स्थायी निवासी कार्ड भी कहा जाता है, एक ऐसा दस्तावेज है जो गैर-अमेरिकी नागरिकों को अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने की परमिशन देता है. इसको I-551 या एलियन रजिस्ट्रेशन कार्ड के नाम से भी जाना जाता है. ग्रीन कार्ड धारक बाद में अमेरिका नागरिकता के लिए भी आवेदन कर सकते हैं. लेकिन जेडी वेंस के बयान ने ऐसा करने का इरादे रखने वालों झटका दिया है. वेंस ने इस बात पर जोर दिया कि निवास आजीवन गारंटी नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि अगर राष्ट्रपति और विदेश मंत्री तय करते हैं कि किसी को अब यहां नहीं रहना चाहिए, तो "उन्हें यहां रहने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है- यह इतना ही सरल है."
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