पुलिस विभाग की गोपनीयता भंग: सिपाही और दलाल की मिलीभगत से चोरी के मोबाइलों का कारोबार
बिहार पुलिस में चोरी या खोए हुए मोबाइलों को ढूंढकर ऑपरेशन मुस्कान के तहत लोगों को उनके मोबाइल लौटा रही हैं. इसको लेकर बिहार पुलिस ने हर जिले में टेक्निकल टीम का गठन किया हैं, जहां 24 घंटे पुलिसकर्मियों की तैनाती रहती हैं. पुलिस के जवान उच्च अधिकारियों को जांच की सारी सूचना उपलब्ध करवाते हैं. मगर यहीं पुलिसकर्मी चंद पैसे की लालच में पुलिस विभाग की सारी सूचना बाहर के लोगों को मुहैया करा रहा है.
पूर्णिया जिला पुलिस बल के डी.आई.यू शाखा में कार्यरत एक सिपाही के द्वारा कटिहार के एक दलाल के माध्यम से पुलिस विभाग का एसडीआर, सीडीआर और मोबाइल का लाइव लोकेशन कई वर्षों से बेचा जा रहा था. इसके लिए वो लोगों से मोटी रकम भी लेता था. इस मामले में पुलिस ने डीआईयू शाखा पूर्णिया में कार्यरत सिपाही के सहयोगी को चोरी के 7 मोबाइल के साथ गिरफ्तार किया है. वहीं जेल भेजे जाने से पहले पुलिस के सहयोगी ने जो राज खोले हैं, वह हैरान कर देने वाले है.
दलालों को देता जानकारी
कटिहार के मुफस्सिल थाना पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि कुछ लोग चोरी के मोबाइलों की खरीद-बिक्री का धंधा करते है. जिसके बाद पुलिस ने टीम का गठन कर कटिहार चंद्रमा चौक पर एक घर में छापेमारी की. जिसमें सुशील कुमार मंडल के पुत्र राजा कुमार उर्फ राजेश कुमार को गिरफ्तार किया. राजेश को देखते ही पुलिस चौक गई. क्योंकि राजेश पुलिस के लिए जाना पहचाना चेहरा था. पुलिस ने राजेश के घर से 7 चोरी किए गए मोबाइल बरामद किए हैं.
डिटेल मिलने पर होती थी खोजबीन
राजेश कुमार कटिहार में पूर्व में पदस्थापित सौरभ कुमार के लिए काम करता था. चोरी या खोए मोबाइल लोगों का आवेदन थाना के पास राजेश लिखने में सहयोग करने के बहाने ले लेता था. इसके अलावा कटिहार के विभिन्न थाने से भी खोए हुए मोबाइल की दर्ज रिपोर्ट के डेटा को इकट्ठा कर सिपाही सौरभ कुमार को दे देता था. वहीं टेक्निकल टीम में पदस्थापित सिपाही सौरभ मोबाइलों की खोजबीन शुरू करता था. वहीं चोरी के मोबाइल का पता लगते ही सिपाही सौरभ पूरा डेटा जो अपने विभाग को देना होता था, उसे अपने सहयोगी राजेश को उपलब्ध करा देता था.
लोगों से ऐंठते थे हजारों रुपए
राजेश मुफस्सिल थाना का पुलिस बनकर मोबाइल चोर या उसके सहयोगी को फोन कर डराता था और चोरी के इल्जाम में जेल की चक्की पिसवाने की धमकी देता था. फोन कर मोबाइल मिल जाने की तरकीब बताया करता था. जिस ब्यक्ति का मोबाइल चोरी होता था, उसे बुलाकर यह कहा जाता था कि पुलिस सिर्फ संनहा दर्ज कर अपना कर्तव्य पूरा करती है, आपका मोबाइल कभी नहीं मिलेगा. अगर मोबाइल चाहिए तो उनकी कुछ चोरों से जान पहचान हैं, उसे कहकर मोबाइल ढूंढ़वाकर आपको दिलवा देंगे. वहीं लोग अपने 50-60 हजार के मोबाइल के बदले 5-10 हजार तक देने को राजी हो जाते थे. आरोपी के सिपाही के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए.
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