AAP में अंदरूनी कलह तेज, पंजाब कार्यकर्ताओं ने नेतृत्व पर सवाल उठाए
चंडीगढ़: आम आदमी पार्टी में पहली बार दिल्ली के नेताओं को बोर्ड और कार्पोरेशन के चेयरमैन लगाने और महत्वपूर्ण स्थानों पर उन्हें बैठाने को लेकर जो बगावत की सुरें पनपने लगी हैं वह पार्टी के लिए संकट खड़ा कर सकती हैं। पार्टी के कई सीनियर विधायकों का कहना है कि वालंटियर अब अपनी अनदेखी बर्दाश्त नहीं कर रहे हैं।
उन्हें लग रहा है कि 2022 में सरकार को लाने में सबसे ज्यादा काम उन लोगों ने किया है और स्थापित पार्टी के नेताओं के साथ दुश्मनियां उन्होंने मोल ली हैं लेकिन अब जब सरकार बन गई हैं तो राज्य सभा की सीटें हों या फिर बोर्ड और कार्पोरेशन के चेयरमैन के पद, इन पर दिल्ली के नेताओं को बिठाया जा रहा है ।
पंजाब के सबसे महत्वपूर्ण बोर्ड पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की कमान दिल्ली की रीना गुप्ता को सौंपने से लंबे समय से दबी चिंगारी को हवा मिली है। हवा देने वालों में आम आदमी पार्टी की महिला विंग की प्रदेश प्रधान प्रीती मल्होत्रा ने दी।
बीते कल पटियाला में उन्होंने वालंटियरों के साथ जिस प्रकार रैली की और पार्टी और सरकार के खिलाफ अपनी भड़ास निकाली उसको देखते हुए पार्टी के पंजाब मामलों के प्रभारी मनीष सिसोदिया ने कमान संभाली है।
हालांकि प्रीती मल्होत्रा को मनाने की बजाए उन्हें महिला प्रधान के पद से हटाकर मोगा की विधायक डॉ अमनदीप कौर को प्रधान बना दिया गया है और यह संकेत दिया गया है कि जो भी बगावती सुर अपनाएगा उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा।
यह बात पार्टी के वालंटियरों को हजम नहीं हो रही है। पार्टी के पूर्व प्रवक्ता इकबाल सिंह ने खुलकर कहा कि जानबूझकर पंजाबियों को दरकिनार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के विभव कुमार से पूछे बिना यहां कोई काम ही नहीं करता और न ही किसी से मिला जा सकता है।
यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि लुधियाना पश्चिमी सीट पर इस समय उपचुनाव चल रहा है और सत्तारूढ़ पार्टी ने अपने राज्य सभा सदस्य संजीव अरोड़ा को मैदान में उतारा हुआ है। पार्टी यह चुनाव हर हालत में जीतना चाहती है क्योंकि इस जीत के चलते खाली होने वाली राज्य सभा की सीट पर दिल्ली के किसी वरिष्ठ नेता को राज्य सभा में भेजा जाएगा। पार्टी प्रधान अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन आदि में से किसी का नंबर लग सकता है।
ऐसे में पार्टी में उठ रही बगावती सुरें और पार्टी को छोड़कर नेताओं के जाने से झटका जरूर लगा है। सभी पार्टियों के घाट का पानी पीकर आम आदमी पार्टी में आने वाले लुधियाना के कमलजीत कड़वल ने आप का झाड़ू छोड़कर कांग्रेस का हाथ पकड़ लिया है। हालांकि कड़वल का दिल्ली बनाम पंजाब वाले विवाद से कोई संबंध नहीं है लेकिन सत्तारूढ़ पार्टी को छोड़कर विपक्ष का दामन थामना कहीं न कहीं यह संकेत जरूर है कि पार्टी में सब अच्छा नहीं है।
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