मंदी की चपेट में रूस, आम लोगों के लिए हालात मुश्किल
मॉस्को। रूस की अर्थव्यवस्था मंदी के कगार पर खड़ी है। इकोनॉमी मिनिस्टर मैक्सिम रेशेत्निकोव ने सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम में ये बात कही। उन्होंने कहा बिजनेस और इंडस्ट्री के आंकड़े दिखा रहे हैं कि देश मंदी के बेहद करीब है। यानी, महंगाई बढ़ रही है, आर्थिक गतिविधियां धीमी हो रही हैं, कारोबार कम हो रहा है, और निवेश रुक रहा है।
रूस में मंदी के पीछे तीन बड़े कारण हैं। पहला, रूस में ब्याज दरें बहुत ज्यादा हैं। हाल ही में ब्याज दर को 21 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत किया गया, लेकिन ये अभी भी इतनी ज्यादा है कि कारोबारी कर्ज लेने से डर रहे हैं। दूसरा, यूक्रेन के साथ चल रहे युद्ध की वजह से रूस पर पश्चिमी देशों के आर्थिक प्रतिबंध हैं, जिसने व्यापार और निवेश को मुश्किल बना दिया है। तीसरा, तेल की कीमतें कम होने से रूस की कमाई पर असर पड़ रहा है। हालांकि बीते कुछ दिनों में इजराइल-ईरान जंग के कारण कच्चे तेल के दामों में तेजी आई है।
यूक्रेन के साथ जंग से बिगड़ी स्थिति
यूक्रेन के साथ करीब 3 साल से चल रही जंग के कारण रूस में महंगाई बहुत ज्यादा है। 2024 में ये 9.5 प्रतिशत थी और 2025 में भी 9.8 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है। महंगाई को काबू करने के लिए सेंट्रल बैंक ने ब्याज दरें बढ़ाईं। ज्यादा ब्याज दर से लोग कम खर्च करते हैं, जिससे मांग घटती है और महंगाई कंट्रोल में आती है। लेकिन इससे कारोबारियों को कर्ज लेना महंगा पड़ रहा है, जिससे निवेश और प्रोडक्शन कम हो रहा है। यूक्रेन के साथ युद्ध के कारण रूस 2025 में अपने बजट का 41 प्रतिशत हिस्सा रक्षा और सुरक्षा पर खर्च करेगा, जो कोल्ड वॉर के समय से सबसे ज्यादा है। इससे बाकी सेक्टर, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, और इन्फ्रास्ट्रक्चर, के लिए पैसा कम बच रहा है। साथ ही, पश्चिमी सैंक्शन्स ने रूस के तेल और गैस निर्यात को मुश्किल बना दिया है। 2023 में रूस की तेल की कमाई 20 प्रतिशत से ज्यादा घट गई थी।
खाने-पीने की चीजें महंगी
आम रूसियों के लिए हालात मुश्किल हो रहे हैं। महंगाई की वजह से खाने-पीने की चीजें, जैसे मक्खन, अंडे, और सब्जियां महंगी हो गई हैं। आलू-प्याज के दाम मई में सालाना आधार पर 2.5 गुना तक बढ़ गए हैं। आलू 166.5 प्रतिशत बढक़र 84.7 रूबल/किग्रा पर पहुंच गया है। प्याज 87.2 प्रतिशत महंगाा हुआ है। इसके दाम 72.3 रूबल/किग्रा हो गए हैं। ज्यादा ब्याज दरों की वजह से कार, घर, या बिजनेस के लिए कर्ज लेना मुश्किल हो गया है। साथ ही, युद्ध और पलायन की वजह से लेबर की भारी कमी है, जिससे प्रोडक्शन और सर्विसेज प्रभावित हो रही हैं।
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