हम किसी भी भाषा के खिलाफ नहीं: मराठी-हिंदी विवाद पर उद्धव ठाकरे का बड़ा बयान
मुंबई: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भाषा विवाद पर एक दिन पहले कहा था कि राज्य में त्रिभाषा फॉर्मूले में हिंदी लागू की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार नए सिर से गठित समिति की रिपोर्ट पर फैसला लेगी। सीएम फडणवीस के बयान बाद महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने साफकिया है कि जबरदस्ती हिंदी को लागू नहीं करने देंगे। मुंबई में पत्रकारों से बातचीत में उद्धव ठाकरे ने कहा कि .मैं मेरी भावनाओं पर कायम हूं। हम किसी भाषा का विरोध नहीं कर रहे, लेकिन सख्ती हम नहीं लागू करने देंगे। फडणवीस ने एक दिन पहले कहा था कि त्रिभाषा सूत्र 100% लागू होगा। कांग्रेस की तरफ से राज्य में मराठी पाठशाला की मांग की जा रही है। इसके जवाब में पिछले दिनों नितेश राणे भड़क गए थे। उन्होंने कहा था कि महाराष्ट्र में मदरसे बहुत हैं। वहां पर मराठी चालू करवाओ।
फिर छिड़ गया भाषा का विवाद
महराष्ट्र में छिड़े हिंदी-मराठी भाषा विवाद के बाद उद्धव ठाकरे ने अपने भाई राज ठाकरे केसाथ वर्ली में मंच को साझा किया था। इस कार्यक्रम में दोनोंने कहा था कि वे मराठी अस्मित के मुद्दों पर एक साथ आए हैं। महाराष्ट्र में भाषा विवाद के बढ़ने पर पहले फडणवीस सरकार ने स्कूलों में त्रिभाषा के तहत हिंदी अनिवार्य किए जाने के आदेश को वापस ले लिया था। इसे बाद सरकार ने एक समिति का गठन किया था। जो यह देख रही है कि त्रिभाषा को कैसे लागू किया जाए। फडणवीस ने कहा था कि तेलगु और दूसरी क्षेत्रीय भाषाओं के लिए छात्र नहीं मिलते हैं। ऐसे में हिंदी ही सिर्फ तीसरी भाषा हो सकती है। फडणवीस त्रिभाषा सूत्र के संदर्भ में नरेंद्र जाधव की अध्यक्षता में एक समिति गठित की है। इसी बीच उद्धव और राज ने कहा है कि उन्हें हिंदी भाषा से विरोध नहीं है, लेकिन अगर हिंदी थोपी गई तो वे यह बर्दाश्त नहीं करेंगे। गौरतलब हो कि मराठी भाषा नहीं बोलने पर मनसे के कार्यकर्ताओं ने मीरा रोड 29 जून को एक मारवाड़ी बिजनेसमैन को पीटा था। इसकी काफी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई थी।
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