अमेरिका में डिजिटल डॉलर को लेकर तैयारी तेज, स्टेबलकॉइन कानून बना आधार
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि जल्द ही कुछ बड़े व्यापारिक समझौते घोषित किए जाएंगे. उन्होंने संकेत दिया कि ये समझौते लगभग तैयार हैं और किसी भी समय घोषित किए जा सकते हैं.
व्हाइट हाउस में स्टेबलकॉइन अधिनियम पर हस्ताक्षर समारोह के दौरान ट्रंप ने कहा, 'हम इसे आज ही कर सकते हैं. शायद थोड़ी देर बाद. हम करेंगे. जब मैं किसी देश को यह पेपर भेजता हूं कि उन्हें 35 या 40 प्रतिशत टैरिफ देना होगा, तो वहीं से डील शुरू हो जाती है. फिर वे कॉल करते हैं और कहते हैं कि क्या कुछ अलग तरह की डील हो सकती है, जैसे कि अपने देश को व्यापार के लिए खोलना.'
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले टैरिफ की 90 दिनों की अवधि को 9 जुलाई से बढ़ाकर 1 अगस्त तक कर दिया गया है. इस दौरान कई प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ वार्ता जारी है.ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि एक अगस्त की समयसीमा के बाद कोई और बदलाव या विस्तार नहीं होगा और उस दिन से टैरिफ लागू होना शुरू हो जाएगा.
ट्रंप ने ऐतिहासिक स्टेबलकॉइन अधिनियम पर भी हस्ताक्षर किए
इस अवसर पर ट्रंप ने एक ऐतिहासिक स्टेबलकॉइन अधिनियम पर भी हस्ताक्षर किए, जो इस क्षेत्र में अमेरिका का पहला संघीय विनियमन है. ट्रंप ने कहा, 'एक्ट एक स्पष्ट और सरल नियामकीय ढांचा प्रदान करता है, जो डॉलर समर्थित स्टेबलकॉइनों की जबरदस्त संभावनाओं को सामने लाएगा. यह अधिनियम स्टेबलकॉइन के लिए मानक तय करता है, जो अमेरिकी डॉलर या अन्य फिएट मुद्राओं से जुड़े डिजिटल करेंसी होते हैं.'
इसकी निगरानी फेडरल रिजर्व और मुद्रा नियंत्रक कार्यालय द्वारा की जाएगी. इसके तहत जारीकर्ताओं को यह जानकारी साझा करना अनिवार्य होगा कि उनके पास आरक्षित निधियों के रूप में अमेरिकी मुद्रा, मांग जमा, सरकारी प्रतिभूतियां और अन्य स्वीकृत परिसंपत्तियां मौजूद हैं. ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि वह अमेरिका को क्रिप्टो की राजधानी बनाना चाहते हैं. उनके अनुसार, स्टेबलकॉइनों का उपयोग अमेरिकी ट्रेजरी में मांग को बढ़ाएगा, ब्याज दरों को कम करेगा और डॉलर को वैश्विक आरक्षित मुद्रा के रूप में मजबूत बनाएगा.
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