मुंबई। मुंबई उपनगर जिलाधिकारी कार्यालय में विश्व हिंदू परिषद की इकाई बजरंग दल की ओर से गौतम रावरिया द्वारा एक ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें हाल ही में रिलीज़ होने वाली फिल्म ‘खालिद का शिवाजी’ के ट्रेलर पर कड़ा विरोध दर्ज कराया गया। इस ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि यह फिल्म छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन एवं उनके गौरवपूर्ण इतिहास को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करती है, जो महाराष्ट्र की जनता और समस्त हिंदू समाज की भावनाओं को आहत करने वाला है।

बजरंग दल की ओर से दिए गए पत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि इस फिल्म में शिवाजी महाराज को लेकर ऐसे संवाद, दृश्य और घटनाएं दिखाए गए हैं जिनका ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है और न ही इस फिल्म का निर्माण किसी प्रतिष्ठित ऐतिहासिक संस्था या प्रामाणिक इतिहासकारों की देखरेख में हुआ है। इससे पहले भी ऐसी फिल्मों के जरिए इतिहास को विकृत कर युवाओं को भ्रमित करने का प्रयास किया जाता रहा हैं। 

 बजरंग दल ने फिल्म के ट्रेलर में निम्नलिखित गंभीर आपत्तियाँ जताई:

अऐतिहासिक व अप्रमाणित चित्रण: फिल्म के ट्रेलर में छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन से जुड़ी घटनाओं को मनगढ़ंत तरीके से दर्शाया गया है जो ऐतिहासिक दस्तावेजों एवं शोधों से मेल नहीं खाता।

धार्मिक भावनाओं को ठेस: शिवाजी महाराज हिंदू समाज के आराध्य हैं और उनके संबंध में गलत प्रस्तुति संपूर्ण हिंदू समाज की भावनाओं को आहत करती है।

अप्रशिक्षित व अप्रमाणिक तथ्य: वेब सीरीज को इतिहास विशेषज्ञों की राय या मान्यता के बिना तैयार किया गया है। इसे किसी भी मान्यता प्राप्त ऐतिहासिक संस्था का समर्थन नहीं मिला है।

राज्य के इतिहास को बदनाम करने का षड्यंत्र: महाराष्ट्र के गौरवमयी इतिहास को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करना राज्य के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने का प्रयास है।

ज्ञापन में प्रमुख रूप से निम्नलिखित मांगें की गई हैं:

फिल्म ‘खालिद का शिवाजी’ के ट्रेलर और प्रस्तावित प्रदर्शन पर तत्काल रोक लगाई जाए। इसके निर्माण से जुड़े लोगों के खिलाफ जांच कर उचित कार्रवाई की जाए। जब तक यह साबित न हो जाए कि वेब सीरीज ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित है, तब तक इसे किसी भी माध्यम से प्रदर्शित न किया जाए।

ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि प्रशासन द्वारा इस विषय पर शीघ्र कार्रवाई अथवा फिल्म पर रोक नहीं लगाई गई, तो बजरंग दल सामाजिक आंदोलन के माध्यम से विरोध प्रदर्शन करेगा। संगठन ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज केवल महाराष्ट्र के ही नहीं, बल्कि पूरे भारतवर्ष के गौरव हैं, और उनके सम्मान के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

मुंबई उपनगर जिलाधिकारी ने इस ज्ञापन को प्राप्त कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।