उत्तर प्रदेश में बाढ़ का कहर: 43 जिलों में पड़ा असर, 18 जिले अब भी प्रभावित, हालात से निपटने में जुटा प्रशासन
लखनऊ: इस वर्ष मानसून के दौरान उत्तर प्रदेश में बाढ़ का असर व्यापक रहा। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 43 जिले प्रभावित हुए, जिनमें अब तक 9.55 लाख से अधिक लोग प्रभावित बताए गए हैं। वर्तमान में 18 जिलों में स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है और लगभग 2.46 लाख लोग सीधे तौर पर प्रभावित हैं। बाढ़ से प्रभावित जिलों में बलिया, बहराइच, बदायूं, चंदौली, फर्रुखाबाद, गोंडा, गाजीपुर, हरदोई, कानपुर नगर, कासगंज, लखीमपुर खीरी, मेरठ, मीरजापुर, मुजफ्फरनगर, प्रयागराज, शाहजहांपुर, उन्नाव और वाराणसी शामिल हैं।
राहत और बचाव कार्यों में प्रशासन की ओर से कई स्तरों पर प्रयास किए गए हैं। प्रदेश में 1796 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं और 1273 मेडिकल टीमों को सक्रिय किया गया है। 3579 नावें और मोटरबोट प्रभावित इलाकों में लगाई गईं। 1391 राहत शिविर स्थापित किए गए, जिनमें से इस समय 557 संचालित हैं और इनमें करीब 80 हजार लोग आश्रय लिए हुए हैं। अब तक एक लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
774 मकानों में से 637 को मुआवजा
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1.82 लाख खाद्यान्न पैकेट और 10.30 लाख लंच पैकेट वितरित किए गए हैं। बाढ़ में क्षतिग्रस्त 774 मकानों में से 637 को मुआवजा दिया गया है, जबकि शेष मामलों पर प्रक्रिया जारी है। स्वास्थ्य और स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए 3.58 लाख ओआरएस पैकेट, 92,020 क्लोरीन टैबलेट और पशुओं के लिए 14,740 क्विंटल चारा वितरित किया गया है। प्रभावित क्षेत्रों में एंटी स्नेक वैनम और एंटी रैबिज टीकों का स्टॉक भी रखा गया है।
राहत सामग्री पहुंचाई जा रही
अधिकारियों का कहना है कि राहत सामग्री और स्वास्थ्य सेवाओं की आपूर्ति जारी रहेगी और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक, मानसून और नदियों के उफान से राज्य के कई हिस्से हर साल बाढ़ का सामना करते हैं। इस बार के अनुभवों ने दीर्घकालिक आपदा प्रबंधन और बेहतर पूर्व तैयारी की आवश्यकता को और स्पष्ट कर दिया है।
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