बोकारो और हजारीबाग में हाथियों के झुंड से किसानों को भारी नुकसान
राज्य में मानसून की बारिश लगातार जारी है, लेकिन इसी बीच हाथियों का झुंड गांवों में घुसकर उत्पात मचा रहा है। बोकारो और हजारीबाग जिलों में गजराजों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि किसानों की नींद उड़ गई है। हाथियों के झुंड ने फसलों को बर्बाद करने से लेकर ग्रामीण इलाकों में दहशत फैलाने तक लोगों को परेशान कर रखा है। स्टील सिटी बोकारो के जंगल क्षेत्र में इन दिनों 42 हाथियों का विशाल झुंड डेरा डाले हुए है, जिसमें तीन छोटे हाथी भी शामिल हैं। यह दल आए दिन गांवों में घुसकर धान और मक्का की फसल रौंद रहा है। कई जगह खेत पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं। किसान बार-बार वन विभाग से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
वहीं हजारीबाग जिले के टाटीझरिया इलाके में भी 30 हाथियों का झुंड डेरा डाले हुए है। हाथियों ने यहां के कई गांवों में तबाही मचाई है। टाटीझरिया निवासी किसान महेंद्र राम ने बताया कि सैकड़ों एकड़ में लगी फसल बर्बाद हो चुकी है। किसानों को अब भारी आर्थिक नुकसान का डर सता रहा है। वे सरकार से तात्कालिक मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में हाथियों की दहशत इतनी बढ़ गई है कि लोग खेतों की रखवाली के लिए रातभर जाग रहे हैं। गांवों में महिलाएं और बच्चे भी भय के माहौल में जी रहे हैं। किसान कह रहे हैं कि मेहनत और लागत से तैयार फसल पलभर में बर्बाद हो जा रही है।
वन विभाग की नजर लगातार हाथियों की गतिविधियों पर है। बोकारो और हजारीबाग के अधिकारियों ने बताया कि हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। वन विभाग के अधिकारी संदीप शिंदे ने कहा –
“हाथियों की गतिविधियों पर हमारी टीम नजर रख रही है। ग्रामीण सतर्क और सजग रहें। हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं ताकि हाथियों को आबादी से दूर रखा जा सके।”
गौरतलब है कि दो-तीन दिन पहले रामगढ़ जिले में भी हाथियों का झुंड डेरा डाले हुए था। वहां से खदेड़े जाने के बाद यह झुंड बोकारो और हजारीबाग की ओर निकल आया। बोकारो में जंगलों और गांवों में फैले 42 हाथियों में से कुछ हाथी अब हजारीबाग के टाटीझरिया क्षेत्र में जम गए हैं। लगातार हाथियों के आने-जाने से ग्रामीण दहशत में हैं। लोग घर से बाहर निकलने में डर महसूस कर रहे हैं। गांव के चौक-चौराहों पर हाथियों के झुंड को लेकर चर्चा का माहौल है। बच्चे घरों से बाहर खेलने नहीं निकल पा रहे हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बारिश और जंगलों में भोजन की कमी के कारण हाथी अब गांवों की ओर रुख कर रहे हैं। फसलें उनके लिए आसान भोजन का साधन बन गई हैं। विशेषज्ञों ने सरकार को सुझाव दिया कि प्रभावित क्षेत्रों में फसलों के नुकसान का आकलन कर किसानों को त्वरित मुआवजा दिया जाए।
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