वेणु श्रीनिवासन की नई भूमिका, टाटा ट्रस्ट के आजीवन ट्रस्टी बनेंगे दो दिन बाकी रहते हुए कार्यकाल पूरा
व्यापार: देश की सबसे बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी टाटा ग्रुप की सबसे बड़े शेयर धारक टाटा ट्रस्ट ने वेणु श्रीनिवासन को आजीवन ट्रस्टी के रूप में दोबारा नियुक्त किया है। बता दें कि श्रीनिवासन का कार्यकाल दो दिन बाद 23 अक्तूबर को खत्म हो रहा था। जानकारी के मुताबिक, वेणु श्रीनिवासन की दोबारा नियुक्ति ट्रस्ट्स की ओर से 17 अक्तूबर 2024 को सर्वसम्मति पास एक प्रस्ताव के बाद किया गया है, जिसमें कहा गया था कि 'किसी ट्रस्टी का कार्यकाल खत्म होने पर उस ट्रस्टी को संबंधित ट्रस्ट की ओर से लाइफटाइम के लिए दोबारा नियुक्त किया जाएगा।' अब इसी नियम से दूसरे ट्रस्टी मेहली मिस्त्री की दोबारा नियुक्ति भी अगले कुछ दिनों में होने वाली है।
ट्रस्टियों ने सर्वसम्मति से लिया फैसला
वेणु श्रीनिवासन को आजीवन ट्रस्टी का फैसला सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टियों ने सर्वसम्मति से लिया। उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई हुई है जब टाटा से जुड़े संगठनों में काफी खींचतान चल रही है और यह दो हिस्सों में बंटा दिख रहा है। जिसमें एक पक्ष नोएल टाटा के साथ और दूसरा पूर्व चेयरमैन रतन टाटा को समर्थन करने वाल लोगों के साथ है।
वेणु श्रीनिवासन के बारे में जानिए
11 दिसंबर को चेन्नई में जन्मे वेणु श्रीनिवासन टीवीएस संस्थापक, टीवी सुंदरम आयंगर के पोते हैं। इन्होंने अन्ना विवि से मैकेनिकल इंजीनियरिंग, पर्ड्यू विवि से मैनेजमेंट में एमएस की पढ़ाई है। इन्हें पर्ड्यू, वॉरविक और आईआईटी खड़गपुर से मानद डॉक्टरेट की उपाधि भी मिली है। वेणु श्रीनिवासन को साल 2004 में जेआरडी टाटा लीडरशिप अवॉर्ड, 2010 में पद्म श्री, 2020 में पद्म भूषण से सम्मानित किया जा चुका है। वेणु श्रीनिवासन की आजीवन ट्रस्टी के रूप में नियुक्ति का मतलब है उनका कार्यकाल कभी खत्म नहीं होगा। ये फैसला जनवरी 2025 में ट्रस्टी और चेयरमैन नोएल टाटा की लाइफटाइम के लिए नियुक्ति के बाद आया है।
क्या है टाटा ग्रुप का पूरा विवाद?
11 सितंबर को हुई मीटिंग से इस विवाद का जन्म हुआ, जिसमें टाटा संस के बोर्ड पर पूर्व रक्षा सचिव विजय सिंह को नामित डायरेक्टर के तौर पर दोबारा नियुक्त करने पर बात होनी थी। लेकिन वे मीटिंग में नहीं आए। रतन टाटा के निधन के बाद ट्रस्ट्स ने फैसला लिया था कि टाटा संस बोर्ड पर नामित डायरेक्टर्स को 75 साल की उम्र के बाद हर साल दोबारा नियुक्त करना पड़ेगा। विजय सिंह 2012 से ये भूमिका निभा रहे थे।
दोबारा नियुक्ति का ये प्रस्ताव नोएल टाटा और वेणु श्रीनिवासन ने रखा था। लेकिन बाकी चार लोग- मेहली मिस्त्री, प्रामित झावेरी, जहांगीर एचसी जहांगीर और डेरियस खंबाटा ने इससे साफ इनकार कर दिया और संख्या बल के बाद प्रस्ताव रद्द हो गया। इसके बाद इन्होंने मेहली मिस्त्री को ही टाटा संस बोर्ड पर नामित के तौर पर प्रस्तावित करने की कोशिश की। लेकिन नोएल टाटा और श्रीनिवासन ने रोक दिया। इस मीटिंग खत्म होते ही विजय सिंह ने टाटा संस बोर्ड से खुद ही इस्तीफा दे दिया।
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