केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को कहा कि अब सड़क निर्माण से जुड़े ठेकेदारों, इंजीनियरों और अधिकारियों की पूरी जानकारी जनता के सामने लाई जाएगी। उन्होंने साफ कहा कि सड़क खराब होने या निर्माण में गलती के लिए सिर्फ मंत्री को दोष नहीं दिया जा सकता।

गडकरी दिल्ली में हुए एक कार्यक्रम “स्मार्ट सड़कों का भविष्य – सुरक्षा, स्थिरता और लचीलापन” में बोले। “जब सड़क बनती है और बाद में खराब हो जाती है, तो लोग मुझे गालियां देते हैं। लेकिन गलती करने वाला ठेकेदार या इंजीनियर होता है। अब मैं तय कर चुका हूं कि सड़क बनाने वाले सभी लोगों की जानकारी जनता को दूंगा — कौन ठेकेदार है, कौन इंजीनियर है, कौन अधिकारी है और किसने सड़क की निगरानी की.

पिछले कुछ समय से देश के अलग-अलग हिस्सों में सड़कों की खराब हालत पर सवाल उठ रहे हैं। सड़कों में गड्ढे, घटिया निर्माण और बारिश के बाद टूट-फूट जैसी समस्याओं के लिए अक्सर मंत्री या सरकार को जिम्मेदार ठहराया जाता है।

गडकरी ने कहा —हर गलती का ठीकरा मेरे सिर पर क्यों फोड़ा जाए? अब जनता को पता चलना चाहिए कि असली जिम्मेदार कौन है।

गडकरी ने बताया कि सड़क मंत्रालय देशभर में आधुनिक और सुरक्षित सड़कों के निर्माण पर तेजी से काम कर रहा है। 25,000 किलोमीटर टू-लेन सड़कों को चार लेन में बदला जा रहा है। बड़े बंदरगाहों को राष्ट्रीय राजमार्गों से जोड़ने के लिए 2 लाख करोड़ रुपये का पोर्ट कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट चल रहा है। मंत्रालय की सालाना आमदनी ₹55,000 करोड़ है, जिसे दो साल में ₹1.4 लाख करोड़ तक बढ़ाने का लक्ष्य है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य है कि भारत को 2027 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाया जाए। इसके लिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी है। सड़कें जितनी बेहतर होंगी, देश की अर्थव्यवस्था उतनी मजबूत होगी। भारत में लगभग 80 प्रतिशत माल सड़कों के जरिए ही आता-जाता है। अगर सड़कें अच्छी होंगी तो लॉजिस्टिक्स की लागत घटेगी और देश को आर्थिक फायदा होगा।

इस फैसले से सड़क निर्माण में पारदर्शिता बढ़ेगी। ठेकेदारों और इंजीनियरों की जिम्मेदारी तय होगी। जनता यह जान सकेगी कि उनके क्षेत्र में कौन सड़क बना रहा है। खराब काम करने वालों की पहचान आसानी से होगी। और सरकार पर गलत आरोप लगाने की प्रवृत्ति घटेगी।

नितिन गडकरी का यह फैसला सड़क निर्माण क्षेत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
अब जनता खुद देख सकेगी कि सड़कें किसने बनाई हैं, और अगर उनमें खराबी है तो कौन जिम्मेदार है। इससे सड़क निर्माण की गुणवत्ता बेहतर होने की उम्मीद है और मंत्रालय की साख भी मजबूत होगी।