मुंबई : देश की सुरक्षा एजेंसियों ने एक सनसनीखेज खुलासा किया है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार अख्तर हुसैन कुतुबुद्दीन अहमद ने महज ₹19,000 खर्च करके फर्जी आधार और पैन कार्ड बनवाए, और उसी के आधार पर पासपोर्ट हासिल कर लिया। इस खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है।

अख्तर ने अपनी पहचान छिपाने के लिए “एलेक्जेंडर पाल्मर” नाम अपनाया और पता जमशेदपुर के एक ईसाई बहुल इलाके का बताया ताकि किसी को शक न हो। उसने 2016 में झारखंड के मुनज्जिल खान नामक व्यक्ति को ₹19,000 दिए, जिसने बिना किसी मूल दस्तावेज के फर्जी आधार और पैन कार्ड तैयार कर दिए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर अख्तर ने 2017 में पासपोर्ट बनवाया और 2022 तथा 2025 में उसका नवीनीकरण भी कराया।

मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश किया। पुलिस ने अख्तर के साथ मुनज्जिल खान को भी गिरफ्तार किया है। अदालत ने मुनज्जिल खान को 1 नवंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। जांच में पुलिस को अख्तर के पास से तीन पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, मोबाइल सिम और स्कूल-कॉलेज के कई फर्जी प्रमाणपत्र मिले हैं।

अख्तर का आपराधिक इतिहास पहले से ही विवादों में रहा है। उसके खिलाफ मेरठ के कंकरखेड़ा थाने में पहले भी मुकदमा दर्ज है। उस पर आरोप है कि उसने उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ लोगों में नफरत और असंतोष फैलाने की कोशिश की थी। अब नए खुलासे के बाद यह साफ होता जा रहा है कि अख्तर लंबे समय से देश विरोधी गतिविधियों में शामिल था।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, अख्तर ने धार्मिक पहचान छिपाने के लिए जानबूझकर ईसाई नाम और पता चुना ताकि वह सुरक्षा जांच में पकड़ा न जा सके। एजेंसियाँ अब यह जांच कर रही हैं कि उसने किन भारतीय प्रतिष्ठानों की जानकारी दुश्मन देशों तक पहुँचाई और किन-किन लोगों से उसका संपर्क था।

यह मामला देश की पहचान और दस्तावेज़ प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सिर्फ ₹19,000 में फर्जी आधार, पैन और पासपोर्ट बन जाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और यह गिरोह कितने समय से सक्रिय था।