मुंबई, सात दिनों तक चले श्री चिन्मय पादुका महोत्सव का भव्य और भक्तिपूर्ण समापन समारोह मुलुंड (पश्चिम) स्थित पुरंदरे हाई स्कूल में अपार श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस आध्यात्मिक आयोजन ने भक्तों को गुरुकृपा और आशीर्वाद से सराबोर कर दिया।

​यह आध्यात्मिक यात्रा पवई आश्रम से प्रारंभ हुई थी, जिसके बाद पिछले पाँच दिनों तक मुलुंड स्थित श्री मुक्तेश्वर आश्रम में यह महोत्सव भक्तिभाव के साथ आयोजित किया गया। भक्तों ने इन सात दिनों में श्री चिन्मय पादुका के दर्शन कर आत्मिक शांति और उत्साह का अनुभव किया।

​समापन समारोह के उपलक्ष्य में एक पारंपरिक पालखी सोहला (जुलूस) निकाला गया। यह सोहला श्री मुक्तेश्वर आश्रम, वालजी लध्दा से शुरू हुआ और भक्तिपूर्ण जयकारों के बीच पुनः आश्रम परिसर में समाप्त हुआ।

​मुख्य समारोह में उपासना और पवित्र अभिषेक जैसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान किए गए, जिसने पूरे वातावरण को और अधिक दिव्य बना दिया।

​कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध सूचना अधिकार कार्यकर्ता अनिल गलगली ने की। उनके मार्गदर्शन में यह समारोह सुचारू रूप से संपन्न हुआ। समापन समारोह में अनेक गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिन्होंने भक्तों को प्रेरणादायी उद्बोधन दिए।

प्रमुख उपस्थित गणमान्य व्यक्तित्व:

  • ऋषि देवव्रत
  • खगोल अध्ययनकर्ता दा.कृ. सोमण
  • परमपूज्य दत्तानंद स्वामी
  • पूर्व नगरसेवक प्रकाश गंगाधरे
  • श्रीकांत सावंत
  • सदाशिव (दादा) परुळकर

​अतिथियों ने अपने विचारों से भक्तों के बीच श्रद्धा, सेवा और संस्कार के महत्व को रेखांकित किया, जिसे इस आयोजन का मूल भाव माना गया।

​पूरे महोत्सव के दौरान भक्तों को भक्तिमय वातावरण में लीन होने का अवसर मिला। सभी भक्तों ने पूर्ण समर्पण के साथ श्री चिन्मय पादुका के दर्शन कर गुरुकृपा और आशीर्वाद का लाभ प्राप्त किया। कार्यक्रम का समापन सामूहिक रूप से गाए गए पसायदान (संत ज्ञानेश्वर की प्रार्थना) के साथ हुआ, जिसने उपस्थित सभी लोगों में शांति और सद्भावना का संदेश फैलाया।

​इस सात दिवसीय महोत्सव ने न केवल भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा, बल्कि उन्हें एकजुटता और सेवाभाव के मूल्यों से भी जोड़ा।