बिहार चुनाव : तेजस्वी की RJD को बड़ा झटका, इन 5 वजहों ने फेरा सीएम बनने की उम्मीदों पर पानी!
RJD election loss Reason: बिहार चुनाव में महा गठबंधन दल को बड़ा झटका लगा है. सीएम पद की शपथ लेने की डेट बताने वाले तेजस्वी यादव की पार्टी 30 सीटों पर आकर टिक गई है. हालांकि ये फाइनल परिणाम नहीं हैं. अभी वोटों की गिनती जारी है. पिछले विधानसभा चुनाव की बात करें तो तेजस्वी को कुल 75 सीटों पर जीत मिली थीं, जो बिहार में सबसे ज्यादा है. लेकिन इस बार पिछली सीटों से करीब 50% कम हुआ. जहां तेजस्वी सीट बढ़ने के साथ ही सीएम बनने का सपना देख रहे थे, वहां परिणाम बिल्कुल ही अलग निकलता दिखाई दे रहा है.
महा गठबंधन में शामिल कांग्रेस को भी 5-7 सीटों पर बढ़त मिलती दिखाई दे रही है. विशेषज्ञों की मानें तो कई ऐसी वजहें रही हैं, जिसकी वजह से तेजस्वी को बड़ा झटका मिला है.
परिवार में विवाद
इस चुनाव से पहले ही लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव विवादों के घेरे में आ गए, जिसके बाद पार्टी और घर दोनों जगहों से तेज प्रताप को निकाल दिया गया. इसके बाद तेज प्रताप ने अलग पार्टी बनाकर खुद चुनाव लड़े और कई प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारा. इसने न सिर्फ तेज प्रताप की सीट पर असर डाला, बल्कि कई सीटों पर आरजेडी का खेल भी बिगड़ गया. परिवार में विवाद का असर समर्थकों पर भी दिखा. कहीं न कहीं, इस पारिवारिक कलह ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया.
लालू प्रसाद की चुनाव से दूरी
विधानसभा चुनाव के दौरान लालू प्रसाद यादव पूरी तरह से दूरी बनाए रहे. जहां उनके प्रचार न करने से समर्थक नाराज हुए, वहीं सत्ताधारी दल ने जंगलराज का जिक्र करते हुए तेजस्वी पर बार-बार निशाना साधा. इस ‘जंगलराज’ के ‘टैग’ से तेजस्वी पीछा नहीं छुड़ा सके.
सीट बंटवारा भी बनी वजह
महागठबंधन में अंतिम समय तक सीट बंटवारे को लेकर विवाद चलता रहा, जिसने आगे चलकर आरजेडी को नुकसान पहुंचाया. इस दौरान करीब 1 दर्जन सीटें ऐसी थीं जहां अंतिम समय तक नहीं विवाद हावी रहा.
तेजस्वी के वादों पर यकीन नहीं
तेजस्वी ने वादे तो बहुत किए लेकिन जनता ने यकीन नहीं किया. वहीं नीतीश कुमार की 10 हजार रुपए महिलाओं को देने की स्कीम लोगों को पसंद आ गई. तेजस्वी ने हर घर में एक सरकारी नौकरी देने का वादा किया था. लेकिन, जनता ने शायद तेजस्वी के इस वादे पर यकीन नहीं किया.
नरेंद्र-नीतीश की जोड़ी लोगों को आई पसंद
रुझान बता रहे हैं कि बिहार में इस बार नीतीश-मोदी की जोड़ी सबको पसंद आई है. इस जोड़ी ने सीट बंटवारे से लेकर हर तरह के मतभेदों को दूर करने के साथ चुनावी रणनीति को अमली जामा पहनाने का काम किया. जहां पीएम मोदी ने भरोसा दिलाया कि डबल इंजन की सरकार रही तो बिहार में विकास होगा, वहीं नीतीश ने सुशासन की सरकार के साथ आगे बढ़ने का वादा दोहराया.
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