UP के इस गांव में श्रवण कुमार ने बिताई थी रात, दातून करके जहां फेंका, आज खड़ा विशाल पेड़
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिला मुख्यालय से लगभग 70 से 80 किलोमीटर दूर एक ऐसा स्थान है, जिसका नाम सीधे-सीधे रामायण काल से जुड़ा माना जाता है. यह स्थान आज ‘श्रवण पाकड़’ के नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि भगवान राम के परम भक्त श्रवण कुमार ने अपने माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर ले जाते समय यहां एक रात विश्राम किया था. उसी घटना के कारण इस स्थान का नाम श्रवण पाकड़ पड़ा.
श्रवण पाकड़ धाम मंदिर के महंत शिव प्रसाद दास बताते हैं कि सुनने में यही आ रहा है कि अपने माता-पिता को कांवड़ यात्रा के दौरान श्रवण कुमार यहां पर रुके थे और जब उनके माता-पिता को प्यास लगी, तो पानी भरने लगे, तो राजा दशरथ को आवाज सुनाई पड़ी और फिर उन्होंने शब्दभेदी बाण चलाया और श्रवण कुमार की मृत्यु हो गई.
क्या श्रवण कुमार ने यहां पर रात बिताई थी?
शिव प्रसाद दास बताते हैं कि हमारे पूर्वज हम लोग को यही बताते थे कि श्रवण कुमार को यहीं पर बाण लगा था और कुछ लोगों का मानना है कि यहां पर श्रवण कुमार ने रात बिताई थी. इसीलिए इस स्थान का नाम श्रवण पाकड़ धाम पड़ा है. श्रवण पाकड़ धाम के रहने वाले राघव राम पांडेय बताते हैं कि हमारे पूर्वज बताते थे कि यहां पर सरवन कुमार ने रात बिताई थी और सुबह पाकड़ के पेड़ से एक तन तोड़कर दातुन किए थे और जो बचा था, उसको फेंक दिए थे, तो वह विशाल पाकड़ के पेड़ का रूप ले लिया था. विगत कुछ वर्ष पहले वह पेड़ तो गिर गया, लेकिन बगल में ही दो पेड़ पाकड़ के अभी भी लगे हैं.
श्रवण पाकड़ धाम नाम के पीछे क्या है रहस्य?
राघव राम पांडेय बताते हैं कि हमारे बाबा हम लोग को बताते थे कि राजा दशरथ ने श्रवण कुमार को यहीं पर शब्दभेदी बाण चलाया था और यहीं पर उन्होंने अपने शरीर को त्यागा था. उन्होंने बताया कि कुछ लोगों का यह भी कहना है कि यहां पर बाण नहीं लगा था, केवल यहां पर श्रवण कुमार ने रात बिताई थी. इसीलिए इस स्थान का नाम श्रवण पाकड़ धाम पड़ा है.
स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस पाकड़ (बरगद प्रजाति का पेड़) के नीचे श्रवण कुमार ने अपने माता-पिता के साथ रात बिताई थी, वह आज भी श्रद्धा का केंद्र है. गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि पीढ़ी दर पीढ़ी यह कथा सुनी और सुनाई जाती रही है. समय के साथ यह जगह धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान बन गई. कुछ लोगों का यह भी मानना है कि यहीं पर ही श्रवण कुमार को शब्दभेदी बाण लगा था.
कहां-कहां से आते हैं श्रद्धालु?
विकासखंड छपिया के ग्राम सभा गुरुग्राम के प्रधान प्रतिनिधि विनय कुमार वर्मा बताते हैं कि हमारे लिए बड़े गर्व की बात है कि हम लोगों के ग्राम सभा में जहां पर ऐतिहासिक और पौराणिक स्थल मौजूद है. उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग में भी श्रवण पाकड़ धाम का उल्लेख किया गया है. बाबूलाल वर्मा बताते हैं कि श्रवण पाकड़ धाम मंदिर में गोंडा, अयोध्या, गोरखपुर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बस्ती, बहराइच और गुजरात के श्रद्धालु आकर दर्शन करते हैं, क्योंकि स्वामी नारायण छपिया मंदिर भी यहां से कुछ ही दूरी पर स्थित है. इसीलिए जो श्रद्धालु स्वामीनारायण छपिया के दर्शन करने आते हैं, वह लोग यहां पर आते हैं.
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