घोटाले की जांच रिपोर्ट जमा करने की समय सीमा तीसरी बार बढ़ी
पुणे में कथित जमीन घोटाले की जांच विकास खड़गे के नेतृत्व वाली समिति कर रही है। इस समिति ने अभी तक अपनी जांच रिपोर्ट सरकार को नहीं सौंपी है। वहीं महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के बेटे पार्थ पवार को राहत के सवाल पर कहा कि रिपोर्ट आने से पहले किसी को भी क्लीन चिट देने का कोई सवाल ही नहीं है। पुणे के पॉश मुंडवा इलाके में 40 एकड़ जमीन 300 करोड़ रुपये में अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी को बेची गई थी, जिसमें पार्थ पवार एक प्रमुख पार्टनर हैं। यह मामला तब जांच के दायरे में आया जब पता चला कि यह प्लॉट सरकार का है और इसे बेचा नहीं जा सकता था। आरोप है कि फर्म को 21 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी से भी छूट दी गई थी।बावनकुले ने कहा कि समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट जमा करने के लिए सरकार से आठ दिन का अतिरिक्त समय मांगा है। उन्होंने कहा रिपोर्ट अभी तक आधिकारिक तौर पर राज्य सरकार को नहीं सौंपी गई है। इसलिए, पार्थ पवार या किसी और को क्लीन चिट देने का कोई सवाल ही नहीं है। मैं लोगों से अपील करता हूं कि वे ऐसे गंभीर मुद्दे पर अटकलें न लगाएं और जनता को गुमराह न करें।
कौन कर रहा है जांच?
अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) विकास खड़गे की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय समिति इस जमीन को बेचने में हुए खामियों की जांच कर रही है। यह पैनल नवंबर की शुरुआत में राजनीतिक विवाद के बीच बनाया गया था और शुरू में इसे पिछले साल 6 दिसंबर तक अपनी रिपोर्ट जमा करने के लिए कहा गया था। बाद में समिति की मांग पर डेडलाइन को दो बार बढ़ाया गया।
अखिलेश यादव का संसद में बड़ा बयान, बोले- 'सरकार के साथ कोई डील तो नहीं हो गई?'
जिम्बाब्वे दौरा टीम इंडिया के लिए क्यों है खास? श्रेयस अय्यर की कप्तानी से नए चेहरों तक सब पर नजर
15 साल पूरे होने पर 'सिंघम' को याद करना पड़ा भारी, अजय देवगन ट्रोलर्स के निशाने पर
शराब पीकर ड्राइविंग करना पड़ा भारी, पूर्व ऑस्ट्रेलियाई स्टार वॉर्नर ने कोर्ट में कबूला जुर्म
DGP की आपत्ति के बाद बड़ा फैसला, IPS सुमन गुप्ता का केंद्रीय डेपुटेशन NOC रद्द
दिल्ली में मेट्रो सेवा प्रभावित, 16 स्टेशन अगले आदेश तक रहेंगे बंद
बम धमाके में परिवार के 14 लोगों की मौत, चार साल बाद दो दोषियों को सजा
आर्थिक बदहाली से जूझ रहा पाकिस्तान, बड़ी आबादी गरीबी के शिकंजे में
सड़क हादसों पर हाईकोर्ट की सख्ती, आवारा मवेशियों को लेकर सरकार और NHAI से जवाब तलब