रूसी तेल से दूरी बना रहा भारत: अमेरिका से नजदीकी के बीच वेनेजुएला से बातचीत, गोर बोले- व्यापार समझौता जल्द
वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां भारत अब रूसी कच्चे तेल की अपनी खरीद को कम करने की दिशा में बढ़ रहा है। भारत में अमेरिका के नवनियुक्त राजदूत सर्जियो गोर के अनुसार, नई दिल्ली अपने तेल विकल्पों में 'विविधता' ला रही है और वेनेज़ुएला से तेल खरीदने के लिए बातचीत जारी है। यह रणनीतिक कदम अमेरिका और भारत के बीच घोषित उस व्यापार समझौते के बाद सामने आया है, जिसमें भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद कम करने का दावा किया गया था।
रूसी तेल पर अमेरिकी रुख और भारत की रणनीति
'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' के दौरान अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बताया कि भारत अपने ऊर्जा विकल्पों में विविधता लाने पर काम कर रहा है और वेनेज़ुएला से तेल खरीद के लिए बातचीत चल रही है। गोर ने साफ किया है कि तेल को लेकर एक सहमति बनी है और अमेरिका नहीं चाहता कि कोई भी देश रूस से तेल खरीदे, यह केवल भारत की बात नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस मुद्दे पर बहुत स्पष्ट हैं; वह युद्ध की समाप्ति चाहते हैं और शांति की उम्मीद में उन सभी गतिविधियों को खत्म होते देखना चाहते हैं जो इस संघर्ष से जुड़ी हैं।
ट्रंप का दावा और भारत का कूटनीतिक रुख
इस व्यापार समझौते की घोषणा 2 फरवरी, 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा की गई थी। ट्रम्प ने अपने 'ट्रुथ सोशल' पोस्ट और व्हाइट हाउस के एक बयान में यह दावा किया था कि भारत रूसी तेल की खरीद को कम करने और उसे पूरी तरह से समाप्त करने पर सहमत हो गया है। हालांकि, भारत की तरफ से ऐसा कोई सीधा बयान नहीं दिया गया है, लेकिन नई दिल्ली ने यह जरूर स्पष्ट किया है कि वह वेनेज़ुएला से तेल सहित अन्य आयात बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार करेगी।
व्यापार समझौते से टैरिफ में भारी कटौती
ऊर्जा के मोर्चे पर इस बदलाव के साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते भी एक नए मुकाम पर पहुंच रहे हैं। ट्रम्प प्रशासन के अधिकारी सर्जियो गोर ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि भारत और अमेरिका के बीच इस व्यापार समझौते पर जल्द ही मुहर लगने की उम्मीद है। यह एक "ऐतिहासिक" समझौता है, जिसके जरिए अमेरिका ने नई दिल्ली पर लगाए जाने वाले टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। देखा जाए तो अमेरिका और भारत के बीच यह व्यापार समझौता केवल व्यापारिक छूट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा कूटनीति का एक बेहद अहम हिस्सा है। भारत द्वारा रूसी तेल के बजाय वेनेज़ुएला जैसे नए ऊर्जा विकल्पों की तलाश करना बदलते वैश्विक व्यापारिक समीकरणों और अमेरिका की भू-राजनीतिक प्राथमिकताओं के साथ तालमेल बिठाने का साफ संकेत है।
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