कॉलेजों की मनमानी उजागर: तय सीट से ज्यादा एडमिशन, दो विश्वविद्यालयों से मान्यता
वैशाली। जिला पहले भी शिक्षा में गड़बड़ियों को लेकर सुर्खियों में रहा है, चाहे टॉपर घोटाला हो, डिग्री घोटाला या परीक्षा केंद्रों को लेकर विवाद। हालांकि हाल के दिनों में ऐसे मामले सामने नहीं आ रहे थे लेकिन अब एक बार फिर जिले की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। हाजीपुर स्थित इंदू देवी रंजीत कुमार प्रकाश प्रोफेशनल कॉलेज और डॉ. रंजीत कुमार प्रकाश कॉलेज की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। डीएम वर्षा सिंह के निर्देश पर गठित जांच टीम ने दोनों कॉलेजों में कई खामियां पाई हैं और उनकी संबद्धता पर पुनर्विचार के लिए विश्वविद्यालय को अनुशंसा की है। मालूम हो कि कई शिकायतों के बाद डीएम ने जांच टीम का गठन किया था, जिसमें उप विकास आयुक्त कुंदन कुमार समेत अन्य अधिकारी शामिल थे। टीम ने 23 मार्च को दोनों कॉलेजों का स्थलीय निरीक्षण किया, जिसमें कई अनियमितताएं उजागर हुईं।
आवंटित सीट से ज्यादा लिया नामांकन
जांच के दौरान पाया गया कि इंदू देवी रंजीत कुमार प्रकाश प्रोफेशनल कॉलेज ने कई कोर्स में निर्धारित सीटों से अधिक छात्रों का नामांकन लिया। कॉलेज द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार बीबीए कोर्स के लिए 300 सीट आवंटित हैं लेकिन 411 छात्रों का नामांकन किया गया। इसी तरह बीसीए कोर्स में 300 सीट के मुकाबले 413 छात्रों का दाखिला लिया गया। यह भी सामने आया कि एक ही कोर्स के लिए कॉलेज ने दो अलग-अलग विश्वविद्यालयों से संबद्धता ले रखी है, जो अपने आप में गंभीर सवाल खड़े करता है। जांच टीम को मिले दस्तावेजों के अनुसार एमबीए कोर्स के लिए कॉलेज को बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय से 240 सीट और आर्यभट्ट नॉलेज विश्वविद्यालय से 360 सीट की अनुमति मिली है।
इसी प्रकार एमसीए कोर्स में बीआरएबीयू से 60 और एकेयू से 120 सीट आवंटित हैं। विशेषज्ञों के अनुसार एक ही कॉलेज द्वारा एक ही कोर्स के लिए दो अलग-अलग विश्वविद्यालयों से संबद्धता लेना गंभीर अनियमितता है और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ की आशंका भी जताई जा रही है। अब वैशाली जिला प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है। शिक्षा विभाग भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की तैयारी में है। सवाल यह उठ रहा है कि कहीं यह मामला फिर से डिग्री घोटाले जैसी स्थिति की ओर तो नहीं बढ़ रहा, जहां बिना उचित पढ़ाई के छात्रों को डिग्री देने का खेल चलता रहा हो। फिलहाल जांच के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ पाएगी।
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