उमरेठ उपचुनाव में भाजपा की बड़ी जीत, हर्षद परमार 30,500 वोटों से विजयी
59.03% मतदान के बाद मतगणना पूरी, 22 राउंड में हुआ फैसला; पोस्टल बैलेट से शुरू हुई काउंटिंग
आणंद: गुजरात की उमरेठ विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजे घोषित हो चुके हैं, जहाँ भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर अपना परचम लहराया है। वल्लभ विद्यानगर के बीजेवीएम कॉलेज में सोमवार सुबह 8 बजे कड़ी सुरक्षा के बीच शुरू हुई मतगणना में भाजपा उम्मीदवार हर्षद परमार ने अपने प्रतिद्वंद्वी को 30,500 मतों के भारी अंतर से शिकस्त दी। 23 अप्रैल को हुए मतदान में जनता ने 59.03 प्रतिशत उत्साह दिखाया था, जिसके बाद आज 22 राउंड तक चली लंबी काउंटिंग प्रक्रिया में हर्षद परमार शुरू से ही बढ़त बनाए हुए थे।
मतगणना प्रक्रिया और प्रशासनिक व्यवस्था
चुनाव परिणाम की सुचिता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए थे, जिसमें करीब 700 अधिकारी और कर्मचारी तैनात रहे। मतगणना की शुरुआत पोस्टल बैलेट और सर्विस वोटर्स के मतों से हुई, जिसके बाद 14 टेबलों पर ईवीएम के वोटों की गिनती का काम सुचारू रूप से आगे बढ़ा। पूरी पारदर्शिता बरतते हुए मुख्य परिणामों की घोषणा के बाद नियम के अनुसार पांच रैंडम मतदान केंद्रों की वीवीपैट पर्चियों का मिलान भी किया गया। उमरेठ तालुका और आनंद ग्रामीण के 46 गांवों सहित तीन नगरपालिकाओं वाली इस सीट पर सुव्यवस्थित तरीके से चुनावी प्रक्रिया संपन्न कराई गई।
विरासत और राजनीतिक अनुभव की जीत
यह उपचुनाव पूर्व विधायक गोविंद परमार के आकस्मिक निधन के कारण अनिवार्य हो गया था, जिसके बाद भाजपा ने उनके बेटे हर्षद परमार पर भरोसा जताया। हर्षद के पास स्थानीय स्वराज की संस्थाओं और ग्राम पंचायतों के कामकाज का लंबा अनुभव है, जो उनकी इस बड़ी जीत में सहायक सिद्ध हुआ। वहीं कांग्रेस ने भृगुराजसिंह चौहान को मैदान में उतारकर मुकाबले को कड़ा बनाने की कोशिश की थी, जो पूर्व में तालुका पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं। हालांकि, मतदाताओं ने हर्षद परमार के प्रशासनिक अनुभव और उनके पिता की विरासत पर अपनी मुहर लगाते हुए उन्हें विधानसभा भेजने का निर्णय लिया।
क्षेत्र का सियासी समीकरण और चुनौतियां
उमरेठ विधानसभा क्षेत्र भौगोलिक रूप से काफी विस्तृत है, जिसमें ओड, उमरेठ और बोरियावी जैसी नगरपालिकाओं का समावेश है। भाजपा की इस जीत ने यह साफ कर दिया है कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में सत्ताधारी दल की पकड़ अभी भी मजबूत बनी हुई है। कांग्रेस प्रत्याशी भृगुराजसिंह चौहान, जो गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी में सक्रिय भूमिका निभाते हैं, के बावजूद विपक्षी खेमा भाजपा के इस गढ़ को भेदने में नाकाम रहा। इस जीत के साथ ही हर्षद परमार अब अपने पिता के अधूरे विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभालेंगे।
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