क्या निशांत कुमार बनेंगे मंत्री? सम्राट चौधरी कैबिनेट को लेकर सियासी अटकलें तेज
पटना: बिहार मंत्रिमंडल विस्तार के बीच निशांत कुमार के नाम पर अटकलें तेज, जदयू के भीतर मंत्री पद को लेकर छिड़ी बहस
जनता दल यूनाइटेड की सदस्यता ग्रहण करने के बाद से ही निशांत कुमार बिहार की राजनीति के केंद्र में बने हुए हैं। हाल ही में जब नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री का पद छोड़ा और सम्राट चौधरी को नया मुख्यमंत्री घोषित किया गया, तब कयास लगाए जा रहे थे कि निशांत कुमार को उपमुख्यमंत्री जैसी बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। हालांकि, पार्टी ने अपने अनुभवी नेताओं को वरीयता दी। अब जब राज्य में मंत्रिमंडल के विस्तार की प्रक्रिया चल रही है, तो एक बार फिर सियासी गलियारों में निशांत कुमार को मंत्री बनाए जाने की चर्चाएं जोरों पर हैं। इन चर्चाओं के बीच पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और रणनीतिकार इस संभावना को खारिज कर रहे हैं। उनका मानना है कि निशांत वर्तमान में बिहार की यात्रा पर हैं और वे जल्दबाजी में कोई भी प्रशासनिक पद स्वीकार करने के बजाय जमीनी स्तर पर राजनीतिक समझ विकसित करने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
उपमुख्यमंत्री की दौड़ के बाद मंत्री पद स्वीकार करने पर पार्टी नेताओं की राय
निशांत कुमार के राजनीतिक भविष्य को लेकर जदयू के भीतर अलग-अलग मत उभरकर सामने आ रहे हैं। कुछ वरिष्ठ नेताओं का तर्क है कि जब कुछ समय पहले तक निशांत कुमार का नाम उपमुख्यमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद के लिए चल रहा था, तो अब उनके लिए मंत्रिमंडल में एक साधारण मंत्री का पद स्वीकार करना उचित नहीं होगा। उनके अनुसार, पद के पदानुक्रम में यह एक कदम पीछे हटने जैसा होगा। नेताओं का कहना है कि निशांत कुमार ने स्वयं स्पष्ट किया था कि वह अगले कुछ समय तक पूरे बिहार का भ्रमण करेंगे ताकि वे जनता की समस्याओं को करीब से जान सकें और लोग भी उनके विचारों से अवगत हो सकें। ऐसी स्थिति में, सम्राट चौधरी की सरकार में फिलहाल शामिल होने के बजाय संगठन के लिए काम करना उनके लंबे राजनीतिक करियर के लिए अधिक फायदेमंद साबित हो सकता है।
पार्टी के आधिकारिक रुख और मीडिया की खबरों के बीच का अंतर
भले ही सोशल मीडिया और मीडिया के विभिन्न वर्गों में निशांत कुमार को मंत्री बनाए जाने की खबरें प्रमुखता से चल रही हों, लेकिन पार्टी के आंतरिक सूत्रों का कहना है कि आधिकारिक तौर पर ऐसी कोई चर्चा फिलहाल नहीं है। जदयू के पदाधिकारियों का मानना है कि इस तरह की खबरें केवल अटकलों पर आधारित हैं। पार्टी के भीतर यह स्पष्ट संदेश है कि इस संबंध में कोई भी अंतिम निर्णय केवल राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ही लेंगे और अब तक उनकी ओर से ऐसा कोई संकेत या निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है। पार्टी कार्यकर्ताओं का एक बड़ा हिस्सा यह भी मानता है कि निशांत को किसी पद पर बैठाने के बजाय उन्हें स्वतंत्र रूप से बिहार के दौरे पर रहने देना चाहिए ताकि वे भविष्य के लिए एक मजबूत और लोकप्रिय नेता के रूप में उभर सकें।
निशांत कुमार की आगामी रणनीति और संगठन में उनकी भूमिका पर नजर
निशांत कुमार फिलहाल किसी भी पद की दौड़ से दूर रहकर खुद को एक गंभीर छात्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं जो बिहार की जटिल राजनीति को करीब से देख रहा है। उनकी बिहार यात्रा को उनके राजनीतिक भविष्य की नींव माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि नीतीश कुमार के विश्वसनीय सहयोगियों ने भी फिलहाल उन्हें किसी भी सरकारी जिम्मेदारी से दूर रखने की सलाह दी है ताकि उनके ऊपर सत्ता विरोधी लहर या शासन की विफलताओं का कोई दाग न लगे। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या निशांत कुमार अपनी यात्रा जारी रखते हैं या पार्टी की रणनीतियों के तहत उन्हें सरकार में कोई विशेष जिम्मेदारी सौंपी जाती है। फिलहाल, जदयू के अंदरूनी खेमे में शांति बनी हुई है और सभी की नजरें राष्ट्रीय अध्यक्ष के अगले कदम पर टिकी हैं।
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