खरीफ पूर्व तैयारी : राजनांदगांव में खाद वितरण तेज, वैकल्पिक उर्वरकों की ओर बढ़ा किसानों का रुझान
रायपुर : छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन 2026 की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। छत्तीसगढ के राजनांदगांव जिले में कृषि विभाग द्वारा धान, दलहन और तिलहन की फसलों के लिए उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। इस वर्ष जिले में पारंपरिक खाद के साथ-साथ नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग को विशेष बढ़ावा दिया जा रहा है।
उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता (गत वर्ष से 82 प्रतिशत अधिक)
प्रशासन द्वारा इस सीजन के लिए कुल 68 हजार 690 मीट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में जिले के पास 40 हजार 670 मीट्रिक टन का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 82 प्रतिशत अधिक है। भंडार में मुख्य रूप से यूरिया 16 हजार 190 मीट्रिक टन, डीएपी 4 हजार 195 मीट्रिक टन, एनपीके 10 हजार 242 मीट्रिक टन, सुपर फास्फेट व अन्य 10 हजार 043 मीट्रिक टन शामिल हैं।
अब तक का वितरण और संतुलित उपयोग
सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से अब तक जिले के 8 हजार 555 किसानों को 2 हजार 843 मीट्रिक टन खाद का वितरण किया जा चुका है। कृषि विभाग वैज्ञानिकों की अनुशंसा के आधार पर किसानों को संतुलित खाद के उपयोग के लिए जागरूक कर रहा है। समितियों में पोस्टर और पाम्पलेट के जरिए बताया जा रहा है कि केवल डीएपी पर निर्भर रहने के बजाय किसान एनपीके मिश्रित उर्वरकों (जैसे 12ः32ः16, 20ः20ः0ः13) का उपयोग करें, जिससे फसल को सभी आवश्यक पोषक तत्व मिल सकें।
जागरूक किसानों की पसंद मिश्रित खाद
डोंगरगांव विकासखंड के किसान मेहरूराम पटेल और टुमेश साहू जैसे कई प्रगतिशील किसान अब अलग-अलग खाद खरीदने के बजाय मिश्रित उर्वरकों को प्राथमिकता दे रहे हैं। उनका मानना है कि इससे न केवल बुवाई सरल होती है, बल्कि प्रति एकड़ पोषक तत्वों की सही मात्रा भी सुनिश्चित होती है। घुपसाल के किसान हेमलाल ने बताया कि वैकल्पिक उर्वरक 20ः20ः0ः13 के उपयोग से नत्रजन और फास्फोरस का बेहतर संतुलन प्राप्त हो रहा है।
कालाबाजारी पर सख्त नजर
उप संचालक कृषि टीकम सिंह ठाकुर ने समितियों और निजी विक्रेताओं को कड़े निर्देश दिए हैं कि किसानों को वितरण में कोई समस्या न हो। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उर्वरक वितरण अनिवार्य रूप से पॉस (POS) मशीन के माध्यम से ही किया जाए। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा अनुशंसित मात्रा का पालन हो। स्टॉक और वितरण की जानकारी का संधारण सटीक हो, ताकि कालाबाजारी पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
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