सीएम सम्राट चौधरी पैदल कार्यालय पहुंचे, पेट्रोल-दर वृद्धि को बताया कारण
पटना: देश के भीतर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुए हालिया इजाफे के बीच बिहार के राजनीतिक गलियारों से एक बेहद अनूठी और अनुकरणीय तस्वीर सामने आई है। राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आज अचानक अपने सरकारी आवास से मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित दफ्तर के लिए पैदल ही रवाना हो गए। मुख्यमंत्री को इस तरह आम राहगीरों की तरह सड़क पर चलते देख हर कोई हैरान रह गया। मुख्यमंत्री ने अपनी इस पैदल यात्रा का एक छोटा सा वीडियो भी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर साझा किया है, जिसमें उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान को स्वीकार करते हुए वे आज पैदल ही कार्यालय पहुंचे हैं, जो अब इंटरनेट पर तेजी से सुर्खियां बटोर रहा है।
मंत्रिमंडल और सहयोगियों ने भी अपनाया सादगी का मार्ग
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की इस अनूठी पहल का असर उनके मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों पर भी तत्काल देखने को मिला। मुख्यमंत्री के पदचिन्हों पर चलते हुए राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री दीपक प्रकाश भी अपने आवास से दफ्तर के लिए पैदल ही निकल पड़े। इसी क्रम में एक और दिलचस्प नजारा तब देखने को मिला जब प्रदेश के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी अपनी चमचमाती सरकारी गाड़ियों को छोड़कर एक साधारण ई-रिक्शा में सवार होकर सचिवालय पहुंचे। सरकार के शीर्ष नेतृत्व द्वारा ईंधन की बचत और पर्यावरण संरक्षण को लेकर किए गए इस जमीनी प्रयास की आम जनता और राजनीतिक हलकों में काफी सराहना की जा रही है।
ईंधन की भारी बचत के लिए मुख्यमंत्री कारकेड में कटौती
इस प्रतीकात्मक शुरुआत से महज दो दिन पहले ही मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार की जनता और प्रशासनिक अधिकारियों से पेट्रोलियम पदार्थों की बचत के लिए वाहनों का कम से कम उपयोग करने की पुरजोर अपील की थी। इस दिशा में खुद उदाहरण पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने अपने स्वयं के कारकेड यानी सुरक्षा काफिले में शामिल होने वाले वाहनों की संख्या को घटाकर न्यूनतम करने का एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। सरकार की ओर से सभी मंत्रियों, निगम बोर्ड के अध्यक्षों, सदस्यों, जनप्रतिनिधियों और आला प्रशासनिक अधिकारियों से साफ तौर पर कहा गया है कि वे किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में अतिरिक्त सुरक्षा या वीआईपी वाहनों के बेड़े के बिना ही शामिल हों।
डिजिटल बैठकों को प्राथमिकता और पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर जोर
राज्य सरकार ने ईंधन की खपत को रोकने के लिए प्रशासनिक स्तर पर भी कई दूरगामी नीतिगत निर्देश जारी किए हैं। सभी सरकारी विभागों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे भविष्य में होने वाली सभी प्रकार की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठकों और महत्वपूर्ण कॉन्फ्रेंस को भौतिक रूप से आयोजित करने के बजाय केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ही संपन्न करें। इसके साथ ही आम नागरिकों से भी यह विशेष आग्रह किया गया है कि वे अपने निजी वाहनों को सड़कों पर निकालने के बजाय मेट्रो, सिटी बस और ऑटो जैसे सार्वजनिक परिवहन के साधनों के उपयोग को प्राथमिकता दें ताकि सामूहिक रूप से ईंधन संकट का मुकाबला किया जा सके।
वर्क फ्रॉम होम की संस्कृति और 'नो व्हीकल डे' का नया विजन
प्रशासनिक सुधारों की इस कड़ी में मुख्यमंत्री ने एक कदम और आगे बढ़ाते हुए सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों के दफ्तरों को 'वर्क फ्रॉम होम' यानी घर से काम करने की कार्यसंस्कृति को फिर से बढ़ावा देने की महत्वपूर्ण सलाह दी है। इसके अलावा समाज में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से सप्ताह में किसी भी एक दिन को अनिवार्य रूप से 'नो व्हीकल डे' के रूप में आयोजित करने का आग्रह किया गया है, जिसके तहत उस दिन लोग अपने वाहनों का त्याग करेंगे। इसी के साथ एक और अनूठा प्रशासनिक निर्देश भी सामने आया है जिसके तहत प्रदेश के सभी सरकारी कार्यालयों की कैंटीन में स्वास्थ्य और पर्यावरण के दृष्टिकोण से पाम ऑयल के इस्तेमाल को भी न्यूनतम करने को कहा गया है।
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