रायपुर में 1.67 करोड़ की साइबर ठगी, तीन आरोपी गिरफ्तार
रायपुर/प्रयागराज। छत्तीसगढ़ की प्रांतीय राजधानी रायपुर के दो संभ्रांत नागरिकों से 1.67 करोड़ रुपये की बड़ी साइबर धोखाधड़ी के मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस की विशेष टीम ने इस अंतरराज्यीय गिरोह पर नकेल कसते हुए हरियाणा, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ के ही राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ से तीन आरोपियों को दबोचा है। पकड़े गए बदमाशों से की गई कड़ाई से पूछताछ में साइबर अपराध जगत को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।
ठगी की रकम का मिलता था 30% कमीशन
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, पकड़े गए तीनों आरोपी गिरोह के लिए फर्जी बैंक अकाउंट का इंतजाम करने, टारगेट को फोन कॉल पर डराने-धमकाने और नकली वेब लिंक तैयार करने का काम संभालते थे। इस काम के एवज में उन्हें ठगी गई कुल राशि का 30 प्रतिशत हिस्सा कमीशन के तौर पर मिलता था। जांच में पता चला है कि उत्तर प्रदेश के प्रयागराज का रहने वाला 22 वर्षीय मुख्य आरोपी आर्यन सिंह पिछले कुछ समय से हरियाणा के गुरुग्राम शहर में छिपकर इस रैकेट को ऑपरेट कर रहा था।
रिटायर्ड अफसर और डॉक्टर को बनाया शिकार, 17 राज्यों में केस दर्ज
इस शातिर गिरोह ने रायपुर के एक सेवानिवृत्त अधिकारी और एक डॉक्टर को 'डिजिटल अरेस्ट' (अवैध रूप से ऑनलाइन बंधक बनाना) का खौफ दिखाकर 1.67 करोड़ रुपये ऐंठ लिए थे। पूछताछ के दौरान पुलिस को आरोपियों के 22 से अधिक सक्रिय बैंक खातों का पता चला है, जिनमें पिछले तीन महीनों के भीतर ही करीब 2 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ है। इन खातों में आरोपियों को 20 लाख रुपये तक की अवैध कमीशन राशि मिली थी। मुख्य आरोपी आर्यन सिंह के खिलाफ देश के 17 अलग-अलग राज्यों में साइबर अपराध के मामले पहले से दर्ज हैं।
104 फर्जी खातों का नेटवर्क, टेक-इंजीनियर निकला मास्टरमाइंड
इस गिरोह के पास करीब 104 'म्यूल अकाउंट्स' (दूसरों के नाम पर खुले फर्जी खाते) का बड़ा नेटवर्क है। कर्नाटक से गिरफ्तार किया गया 33 वर्षीय आरोपी जितेंद्र कुमार कोई साधारण अपराधी नहीं, बल्कि पेशे से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। वह पहले एक बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनी (MNC) में ऊंचे पद पर नौकरी करता था, लेकिन बाद में ज्यादा पैसों के लालच में साइबर अपराधियों के चंगुल में फंस गया।
वह गिरोह के लिए फर्जी मोबाइल एप्लीकेशन, घातक एपीके (APK) फाइलें और स्पैम लिंक तैयार करता था ताकि लोगों को डिजिटल अरेस्ट का शिकार बनाया जा सके। उस पर आरोप है कि उसने रायपुर की रिटायर्ड अधिकारी पुष्पा अग्रवाल को डराकर अकेले ही 42 लाख रुपये की चपत लगाई थी। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को खंगाल रही है।
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