मुंबई: बीएमसी और एमएमआरडीए के लिए स्वतंत्र ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल शुरू करने की मांग; धारा 4 के कड़ाई से पालन पर जोर

विशेष संवाददाता, मुंबई

3 जून, 2026

मुंबई: महाराष्ट्र राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त राहुल पांडे से प्रसिद्ध सूचना अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता अनिल गलगली ने एक सद्भावना भेंट की। इस बैठक के दौरान सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रभावी क्रियान्वयन, लंबित मामलों और आरटीआई व्यवस्था को अधिक पारदर्शी व नागरिक-केंद्रित बनाने से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

प्रमुख बिंदु और समीक्षा

​बैठक में महाराष्ट्र के विभिन्न सार्वजनिक प्राधिकरणों में दायर होने वाले आरटीआई आवेदनों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई। चर्चा के मुख्य बिंदु निम्नलिखित रहे:

  • लंबित मामलों की समीक्षा: प्रथम और द्वितीय अपीलों की वर्तमान स्थिति तथा नागरिकों को समय पर सूचना प्राप्त करने में आने वाली कठिनाइयों पर विचार-विमर्श किया गया।
  • पारदर्शिता और जवाबदेही: सूचना अधिकार व्यवस्था में अधिक कार्यकुशलता और प्रशासनिक जवाबदेही लाने के लिए आवश्यक उपायों पर चर्चा हुई।
  • बढ़ता कार्यभार: बैठक में इस बात पर भी चिंता व्यक्त की गई कि कुछ मामलों में एक ही आवेदक द्वारा हजारों की संख्या में द्वितीय अपीलें दायर की जा रही हैं, जिससे आयोग का कार्यभार बढ़ रहा है और अन्य सामान्य आवेदकों के मामलों के निपटारे में देरी होती है।

बीएमसी और एमएमआरडीए के लिए ऑनलाइन पोर्टल की मांग

​इस अवसर पर अनिल गलगली ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) तथा मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (MMRDA) के लिए स्वतंत्र ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल प्रारंभ करने हेतु राज्य सूचना आयोग से आवश्यक निर्देश जारी करने का अनुरोध किया।

​"राज्य के अनेक विभागों में ऑनलाइन आरटीआई व्यवस्था उपलब्ध है, किंतु मुंबई की इन दोनों महत्वपूर्ण और बड़ी संस्थाओं में अभी तक समग्र ऑनलाइन आरटीआई प्रणाली लागू नहीं होने के कारण नागरिकों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ता है।"

— अनिल गलगली, आरटीआई कार्यकर्ता

 

​गलगली ने एक और महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए मांग की कि आरटीआई के तहत दायर आवेदनों, विभागों द्वारा दिए गए उत्तरों और उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों का एक सार्वजनिक डेटाबेस तैयार किया जाए। इससे एक ही प्रकार की जानकारी के लिए बार-बार आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी और प्रशासनिक पारदर्शिता मजबूत होगी।

धारा 4 का कड़ाई से हो पालन: मुख्य सूचना आयुक्त

​शिकायतों और सुझावों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए मुख्य सूचना आयुक्त राहुल पांडे ने स्पष्ट किया कि राज्य के सभी सार्वजनिक प्राधिकरणों को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 4 (Proactive Disclosure) का कड़ाई से पालन करना चाहिए।

​मुख्य सूचना आयुक्त ने कहा:

  1. ​नागरिकों को अधिकतम जानकारी स्वतः (स्वप्रकाशित रूप में) वेबसाइटों पर उपलब्ध कराने के लिए आयोग आवश्यक कदम उठा रहा है।
  2. ​यदि सभी विभाग धारा 4 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हैं, तो नागरिकों को आरटीआई लगाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
  3. ​इससे आरटीआई आवेदनों की संख्या में कमी आएगी और प्रशासन अधिक पारदर्शी तथा नागरिक-केंद्रित बनेगा।