कांग्रेस में मतभेद: राहुल गांधी पसंद करते हैं मीनाक्षी नटराजन, अन्य नेता नापसंद
नई दिल्ली/भोपाल: मध्य प्रदेश में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द होने के बाद से राजनीतिक बवाल लगातार बढ़ता जा रहा है। इस फैसले के विरोध में मंगलवार देर रात जयराम रमेश, केसी वेणुगोपाल, सचिन पायलट और भूपेश बघेल जैसे कांग्रेस के राष्ट्रीय दिग्गजों ने दिल्ली में चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर जोरदार धरना दिया था। इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद, आज कांग्रेस का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात कर नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ अपनी आपत्ति दर्ज कराएगा।
राहुल गांधी की कोर टीम का हिस्सा हैं नटराजन
मीनाक्षी नटराजन को कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी का बेहद करीबी और भरोसेमंद माना जाता है। हालांकि, उन्हें राज्यसभा प्रत्याशी बनाए जाने के बाद से ही पार्टी के भीतर अंदरूनी सुगबुगाहट शुरू हो गई थी। मध्य प्रदेश कांग्रेस के कुछ नेताओं का दबी जुबान में मानना था कि शीर्ष नेतृत्व को किसी ऐसे चेहरे को मौका देना चाहिए था, जिसका जमीन पर और राज्य की जनता के बीच अधिक प्रत्यक्ष आधार हो।
वरिष्ठ नेता नरेश ज्ञानचंदानी का पार्टी से इस्तीफा
भले ही मध्य प्रदेश कांग्रेस के अग्रिम पंक्ति के नेताओं ने मीनाक्षी नटराजन के नाम पर एकजुटता दिखाने की कोशिश की हो, लेकिन पार्टी के भीतर का असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नरेश ज्ञानचंदानी ने नटराजन को उम्मीदवार बनाए जाने पर सार्वजनिक रूप से गंभीर सवाल उठाए और इसके तुरंत बाद पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। ज्ञानचंदानी ने इस्तीफा देते हुए कहा कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व का ध्यान अपनी चिंताओं की ओर खींचने का प्रयास किया था, लेकिन जब उनकी बात नहीं सुनी गई तो उन्होंने अलग होने का फैसला किया।
NSUI अध्यक्ष से सांसद बनने तक का सफर
मीनाक्षी नटराजन का कांग्रेस में एक लंबा संगठनात्मक इतिहास रहा है। वह साल 1999 से 2002 तक कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) की राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुकी हैं। इसके बाद, उन्होंने अगले तीन सालों (2002 से 2005) तक मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली, जिसके बाद राष्ट्रीय राजनीति में उनका कद तेजी से बढ़ा।
दरअसल, साल 2007 में राहुल गांधी को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) का महासचिव बनाया गया था। इसके बाद 2008 में जब राहुल गांधी को युवा नेताओं की एक नई और मजबूत टीम तैयार करने का जिम्मा मिला, तब उन्होंने मीनाक्षी नटराजन को अपनी मुख्य कोर टीम में शामिल किया। राहुल गांधी की इस शुरुआती टीम में कृष्णा अल्लावरु, सचिन राव और प्रवीण चक्रवर्ती जैसे नेता भी शामिल थे, जो आज भी कांग्रेस में बेहद महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा रहे हैं। इसी टीम के सदस्य प्रवीण चक्रवर्ती इस बार तमिलनाडु से निर्विरोध राज्यसभा सदस्य चुने जा रहे हैं।
साल 2008 में राहुल गांधी ने नटराजन को एआईसीसी (AICC) का सचिव नियुक्त किया और इसके ठीक अगले साल यानी 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्हें मध्य प्रदेश की मंदसौर सीट से टिकट दिया। इस चुनाव में मीनाक्षी नटराजन ने शानदार जीत दर्ज कर संसद में कदम रखा था। अब उनके इसी नामांकन पर उपजे विवाद को लेकर कांग्रेस सड़क से लेकर चुनाव आयोग तक आर-पार की लड़ाई लड़ रही है।
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