तृणमूल कांग्रेस में बड़ा विवाद, पार्टी के प्रतीक पर अधिकार को लेकर टकराव
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में सत्ता गंवाने के बाद ममता बनर्जी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों ने पार्टी को बड़ा झटका देते हुए त्रिपुरा की एक पार्टी के साथ विलय करने का फैसला किया है। साथ ही इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलकर सदन में अपने लिए अलग बैठने की व्यवस्था करने की मांग की है।
ममता के सबसे भरोसेमंद सुदीप बंदोपाध्याय भी बागी गुट में शामिल
लोकसभा में दो-तिहाई सांसदों की बगावत के बाद बागी खेमे को जिस बड़े चेहरे की तलाश थी, वह सुदीप बंदोपाध्याय के रूप में पूरी हो गई है। सुदीप बंदोपाध्याय कभी ममता बनर्जी के सबसे खास और लोकसभा में टीएमसी के संसदीय दल के नेता थे। बागी गुट में शामिल होते ही उन्होंने ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और साफ किया है कि त्रिपुरा की पार्टी के साथ उनका विलय केवल एक अस्थायी व्यवस्था है।
क्या है बागी गुट का लॉन्ग टर्म प्लान?
सुदीप बंदोपाध्याय ने पत्रकारों से बातचीत में बागी खेमे की आगे की रणनीति का खुलासा किया:
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लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसदों में से 20 सांसद बागी गुट के साथ हैं, जो कि दो-तिहाई से ज्यादा है।
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नियम के मुताबिक, बगावत के पहले ही दिन असली पार्टी के नाम और सिंबल पर दावा नहीं किया जा सकता।
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इसलिए बागी खेमा आगामी जुलाई महीने में चुनाव आयोग और अदालत के सामने आधिकारिक तौर पर यह मांग रखेगा कि दो-तिहाई बहुमत होने के कारण उन्हें ही 'असली तृणमूल कांग्रेस' माना जाए।
त्रिपुरा की 'NCPI' पार्टी में विलय और NDA को समर्थन
बागी सांसदों की अगुवाई कर रही सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने बताया कि 20 सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक आवेदन लोकसभा अध्यक्ष को सौंपा गया है। इसके तहत बागी गुट त्रिपुरा की एक कम चर्चित पार्टी 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में अपना विलय कर रहा है। विलय के बाद यह गुट केंद्र की भाजपा नीत एनडीए (NDA) सरकार को अपना समर्थन देगा। बता दें कि NCPI त्रिपुरा की एक पंजीकृत पार्टी है, जिसका अब तक कोई खास राजनीतिक वजूद नहीं रहा है।
लोकसभा में एनडीए की सबसे बड़ी सहयोगी बनेगी यह पार्टी
यदि टीएमसी का यह बागी गुट एनडीए को समर्थन देता है, तो यह संसद में भाजपा की सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी बन जाएगी। वर्तमान में एनडीए में आंध्र प्रदेश की टीडीपी (16 सांसद) और बिहार की जेडीयू (12 सांसद) सबसे बड़े सहयोगी हैं। अब टीएमसी के 20 बागी सांसदों के जुड़ने से लोकसभा में एनडीए की कुल ताकत बढ़कर 313 तक पहुंच सकती है। इस कदम पर भाजपा ने भी खुशी जताते हुए कहा है कि यदि ये सांसद एनडीए का समर्थन करते हैं तो यह देश के लिए अच्छा होगा।
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