सालभर बना रहता है सांपों का खतरा, गढ़वा में पांच महीने में 59 लोग हुए शिकार
गढ़वा। जिले में लगातार बदल रहे पर्यावरण और मौसम के मिजाज ने आम जनता के सामने एक बेहद गंभीर और नई स्वास्थ्य चुनौती ला खड़ी की है। पहले जहां सांपों के डसने का खतरा केवल मानसून या बाढ़ के दिनों तक ही सीमित माना जाता था, वहीं अब यह समस्या पूरे बारह महीने बनी हुई है। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, चालू वर्ष 2026 के शुरुआती पांच महीनों (जनवरी से मई) के दौरान ही जिले में सर्पदंश के कुल 59 आधिकारिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं। आमतौर पर शांत रहने वाले शीतकाल और वसंत ऋतु में भी सांपों के बिलों से बाहर आने और इंसानों पर हमला करने की इन घटनाओं ने स्वास्थ्य विभाग और विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है।
असमय बदलते तापमान और इंसानी दखल से बदला सांपों का व्यवहार
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और महामारी विज्ञानियों के अनुसार, पहले सांप काटने की घटनाएं मुख्य रूप से जुलाई से सितंबर के बीच भारी बारिश के समय होती थीं, जब बिलों में पानी भरने से जीव बाहर आते थे। मगर अब जनवरी की तीव्र ठंड और फरवरी-मार्च के महीनों में भी सांपों का खौफ देखा जा रहा है। इसके पीछे तीन बड़े कारण सामने आए हैं; पहला, वैश्विक तापमान में असंतुलन के कारण सर्दियों में भी गर्मी का अहसास होना, जिससे सांपों की शीतकालीन निद्रा बाधित हो रही है। दूसरा, जंगलों की अंधाधुंध कटाई से उनके प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं और वे भोजन की तलाश में रिहायशी इलाकों की ओर भाग रहे हैं। तीसरा, घरों के आसपास जमा कचरा और अनाजों के सही रखरखाव न होने से चूहों की तादाद बढ़ गई है, जो सांपों का पसंदीदा शिकार हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष जनवरी में 5, फरवरी में 16, मार्च में 20, अप्रैल में 9 और मई में 9 मामले अस्पतालों में दर्ज किए गए हैं।
जागरूकता की कमी और अंधविश्वास के कारण ओझा-गुनी के चक्कर में फंस रहे ग्रामीण
इस गंभीर समस्या का दूसरा चिंताजनक पहलू यह है कि सामने आए 59 मामले केवल वे हैं जो पीड़ित समय रहते सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंच गए। जिले के सुदूर और ग्रामीण अंचलों में जमीनी हकीकत इससे कहीं अधिक भयावह हो सकती है। आज भी शिक्षा के अभाव और गहरे अंधविश्वास के चलते लोग सांप के काटने पर अस्पताल भागने के बजाय स्थानीय ओझा-गुनी, तांत्रिकों और झाड़-फूंक करने वालों की शरण में चले जाते हैं। इस अंधविश्वास के चक्कर में बहुमूल्य समय नष्ट हो जाता है और जब तक गंभीर हालत में मरीज को सदर अस्पताल लाया जाता है, तब तक विष पूरे शरीर में फैल चुका होता है, जिससे इलाज करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
सभी सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त एंटी-वेनम और जीवन रक्षा के जरूरी उपाय
स्वास्थ्य विभाग के जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) गौरव कुमार ने जनता को भरोसा दिलाते हुए कहा है कि जिले का चिकित्सा तंत्र इस चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। गढ़वा सदर अस्पताल सहित सभी प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) में सांप के जहर को बेअसर करने वाली दवा 'एंटी-स्नेक वेनम' प्रचुर मात्रा में मुफ्त उपलब्ध है। विभाग ने गाइडलाइन जारी कर बताया है कि सर्पदंश की स्थिति में मरीज को शांत और स्थिर रखें, प्रभावित अंग से अंगूठी या तंग कपड़े हटा दें और तुरंत एम्बुलेंस से अस्पताल लाएं। वहीं, घाव पर चीरा लगाने, मुंह से जहर चूसने या किसी भी तरह की घरेलू जड़ी-बूटी देने से पूरी तरह परहेज करने की सलाह दी गई है।
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