सोनीपत में मुठभेड़ के दौरान गैंगस्टर गोपाल का अंत, हेड कांस्टेबल के हाथ में लगी गोली
सोनीपत। जिला अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) और गन्नौर सीआईए पुलिस की संयुक्त टीम की सोमवार तड़के गांव खुबडू के खेतों में कुख्यात गैंगस्टर गोपाल के साथ सीधी मुठभेड़ हो गई। खुद को पुलिस से घिरा देख जब आरोपी ने अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दीं, तो पुलिस ने भी आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की, जिसमें गैंगस्टर गोपाल ढेर हो गया। इस क्रॉस-फायरिंग के दौरान सीआईए-1 के हेड कांस्टेबल देवेंद्र के हाथ में गोली लग गई, जिससे वे घायल हो गए। उन्हें तुरंत इलाज के लिए खानपुर स्थित बीपीएस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, मारा गया बदमाश गोपाल मूल रूप से गांव अटायल का निवासी था और हत्या के दो अलग-अलग संगीन मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहा था। वह इसी साल मार्च के महीने में जेल से पैरोल पर रिहा हुआ था, लेकिन अवधि खत्म होने के बाद 30 मई को उसने सरेंडर नहीं किया और फरार हो गया। पैरोल जंप करने के बाद से ही वह सोनीपत और पानीपत के इलाकों में लगातार नई वारदातों को अंजाम देकर कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बना हुआ था।
मर्डर की नई साजिश रचते वक्त पुलिस ने घेरा
पुलिस को खुफिया सूत्रों से पुख्ता जानकारी मिली थी कि फरार गैंगस्टर गोपाल इलाके के ही एक अन्य ग्रामीण की हत्या करने का नया ताना-बाना बुन रहा है और वह खुबडू के आसपास देखा गया है। इस इनपुट के आधार पर सोमवार सुबह करीब छह बजे सीआईए-1 और गन्नौर थाना पुलिस की विशेष टीमों ने संयुक्त रूप से खेतों की घेराबंदी शुरू की। पुलिस ने जब उसे सरेंडर करने की चेतावनी दी, तो आरोपी ने आत्मसमर्पण करने के बजाय सरकारी अमले पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं, जिसमें एक जांबाज हवलदार जख्मी हो गया। इसके बाद पुलिस की ओर से की गई डिफेंसिव फायरिंग में गोपाल को कई गोलियां लगीं और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
दर्जनों संगीन मुकदमे और इलाके में दहशत का पर्याय
गैंगस्टर गोपाल का आपराधिक इतिहास बेहद लंबा और खौफनाक रहा है। पुलिस डोजियर के अनुसार, उस पर मर्डर, मर्डर की कोशिश, बलात्कार, रंगदारी और आर्म्स एक्ट जैसे संगीन अपराधों के तहत करीब 25 गंभीर मुकदमे दर्ज थे। जेल से पैरोल पर बाहर आने के बाद भी उसकी आपराधिक गतिविधियां रुकी नहीं थीं; उसने पानीपत में एक और गन्नौर थाना क्षेत्र के अंतर्गत तीन नई वारदातों को अंजाम देकर पूरे इलाके में दहशत फैला रखी थी। जांच एजेंसियों को आशंका थी कि अगर उसे समय रहते काबू नहीं किया गया, तो वह बहुत जल्द किसी बड़ी खूनी वारदात को अंजाम दे सकता था।
पुलिस कमिश्नर ने किया मौका-मुआयना, मजिस्ट्रेट जांच के आदेश
इस सनसनीखेज एनकाउंटर के बाद पुलिस कमिश्नर ममता सिंह ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सीधे घटनास्थल का दौरा किया और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स से साक्ष्य जुटाने के निर्देश दिए। इसके बाद वे खानपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचीं, जहां उन्होंने घायल हेड कांस्टेबल देवेंद्र की सेहत की जानकारी ली और डॉक्टरों को बेहतर इलाज मुहैया कराने को कहा। पुलिस कमिश्नर ने मीडिया से बातचीत में बताया कि पुलिस की मुस्तैदी और समय पर की गई कार्रवाई की वजह से एक बेकसूर ग्रामीण की जान बचाई जा सकी है। उन्होंने यह भी साफ किया कि मानवाधिकार आयोग के नियमों के मुताबिक इस पूरी मुठभेड़ की मजिस्ट्रेट जांच (न्यायिक जांच) कराई जा रही है। वर्तमान में आरोपी के शव को पोस्टमार्टम के लिए शवगृह में रखवा दिया गया है।
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