साल की बच्ची के रेप और हत्या के दोषी को नहीं पछतावा, कोर्ट ने पूछा- क्या सजा दी जाए?
पुणे। महाराष्ट्र के पुणे जिले के भोर तालुका अंतर्गत नसरपुर में हुई चार वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और उसकी नृशंस हत्या के मामले में पुणे डिस्ट्रिक्ट सेशंस कोर्ट ने गुरुवार (25 जून) को ऐतिहासिक तेजी दिखाते हुए आरोपी को दोषी करार दिया है। राज्य के न्यायिक इतिहास में यह संभवतः सबसे तेज गति से चलने वाला मुकदमा बन गया है, जिसमें घटना के मात्र ढाई महीने के भीतर विशेष न्यायाधीश एस.आर. सालुंखे की अदालत ने फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने आरोपी भीमराव कांबले को दोषी पाया है, जिसके खिलाफ दर्ज धाराओं में से दो में मृत्युदंड (फांसी) और अन्य में आजीवन कारावास का प्रावधान है। अदालत दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें सुनने के बाद जल्द ही सजा की अवधि का निर्धारण करेगी।
गौशाला में ले जाकर पत्थर से कुचला था सिर; सीसीटीवी फुटेज ने खोली कातिल की पोल
यह दिल दहला देने वाला मामला 1 मई (महाराष्ट्र दिवस) का है, जब गर्मी की छुट्टियां मनाने अपनी नानी के घर आई एक चार साल की मासूम बच्ची घर के बाहर खेल रही थी। तभी पड़ोस में रहने वाले 65 वर्षीय भीमराव कांबले ने बच्ची को बहला-फुलाकर एक गौशाला में ले जाकर उसके साथ दरिंदगी की। पकड़े जाने के डर से उसने मासूम के सिर पर भारी पत्थर मारकर उसकी हत्या कर दी और शव को गोबर के ढेर में छुपा दिया। दोपहर बाद जब परिजनों ने बच्ची की तलाश शुरू की, तो उसका शव बरामद हुआ। इलाके में लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों को खंगालने पर आरोपी बच्ची का हाथ पकड़कर गौशाला की तरफ ले जाता हुआ साफ दिखाई दिया, जो अदालत में सबसे बड़ा सबूत बना।
कोर्ट में भी आरोपी को नहीं रहा कोई पछतावा, अभियोजन पक्ष ने की फांसी की मांग
सुनवाई के दौरान अदालत कक्ष में बेहद तीखी बहस देखने को मिली। विशेष लोक अभियोजक (स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर) एडवोकेट मिलिंद पवार ने मीडिया को बताया कि पूरे ट्रायल के दौरान दोषी कांबले के चेहरे पर जरा सा भी पछतावा या अफसोस नजर नहीं आया। जब न्यायाधीश ने उसे कटघरे में खड़ा कर पूछा कि इस अपराध के लिए उसे क्या सजा दी जानी चाहिए, तो वह झूठी कहानियां गढ़ने लगा और खुद को बेकसूर बताने लगा। अभियोजन पक्ष ने इसे 'दुर्लभ से दुर्लभतम' (Rarest of Rare) मामला बताते हुए दोषी को फांसी की सजा देने की पुरजोर मांग की है। सरकारी वकील ने कोर्ट को यह भी बताया कि आरोपी का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और इस घिनौने कृत्य के कारण उसका खुद का परिवार भी उसके बचाव में नहीं आया।
बचाव पक्ष ने उम्र का दिया हवाला; पूर्व में भी दो मामलों में बच निकला था आरोपी
दूसरी तरफ, दोषी के वकील ने कोर्ट से रहम की अपील करते हुए दलील दी कि घटनाक्रम की कुछ कड़ियां पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा कि आरोपी की उम्र 65 वर्ष है, इसलिए उसकी वृद्ध अवस्था को ध्यान में रखते हुए फांसी के बजाय आजीवन कारावास की सजा दी जानी चाहिए। उल्लेखनीय है कि इस दरिंदे का यह तीसरा अपराध है, इससे पहले भी वह दो गंभीर मामलों में सबूतों के अभाव के कारण कानून के शिकंजे से बच निकला था। घटना के वक्त आक्रोशित ग्रामीणों ने आरोपी को पकड़कर पहले उसकी जमकर धुनाई की थी और फिर पुलिस के हवाले किया था। अब पूरे राज्य की नजरें कोर्ट द्वारा सुनाई जाने वाली अंतिम सजा पर टिकी हुई हैं।
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