घरों में काम करती है मां, बेटी को मिला 20 करोड़ का इनकम टैक्स नोटिस; जानिए पूरा मामला
उन्नाव: उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से जालसाजी और डेटा चोरी का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां के एक अत्यंत गरीब परिवार की शिक्षित बेटी उस समय गहरे सदमे में आ गई, जब उसे चंडीगढ़ स्थित इनकम टैक्स (आयकर) विभाग के कार्यालय से एक नोटिस प्राप्त हुआ। इस नोटिस के जरिए विभाग ने युवती से कबाड़ (स्क्रैप) के कारोबार से हुई करीब 20 करोड़ रुपये की मोटी कमाई का पूरा ब्योरा और टैक्स हिसाब मांगा है। इतनी बड़ी रकम का नोटिस देखकर पीड़िता और उसका परिवार बुरी तरह खौफजदा है। पीड़िता ने इस मामले में तत्काल संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (आईजीआरएस) और जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) को लिखित शिकायती पत्र सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है।
दो कमरों के घर में तिरपाल के साये में रहता है परिवार
विभागीय सूत्रों के अनुसार, सदर कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गिरजाबाग मोहल्ले की रहने वाली रश्मि सविता ने बताया कि उसने हाल ही में स्नातक (बीए) की पढ़ाई पूरी की है और फिलहाल वह नौकरी की तलाश में घर पर ही रहती है। उसके पिता अजय शंकर पेशे से दिहाड़ी मजदूर हैं, जो कड़ी मेहनत कर किसी तरह परिवार का पेट पालते हैं। दो कमरों के जर्जर मकान में पूरा परिवार गुजर-बसर करने को मजबूर है, जिसकी छत को धूप और पानी से बचाने के लिए ऊपर तिरपाल बांधा गया है।
रश्मि ने बताया कि बीते 9 मई को उसके नाम पर चंडीगढ़ आयकर विभाग का एक आधिकारिक पत्र (नोटिस) आया। जब उसने नोटिस खोला, तो उसके होश उड़ गए, क्योंकि उसमें दर्ज था कि रश्मि के नाम पर रजिस्टर्ड फर्म ने कबाड़ के व्यापार के जरिए 20 करोड़ रुपये का टर्नओवर किया है। पीड़िता ने किसी तरह हिम्मत जुटाकर कानूनी जानकारों की मदद से उक्त नोटिस का अपनी ओर से प्राथमिक जवाब डाक द्वारा भेज दिया है।
कंप्यूटर कैफे संचालक पर दस्तावेज चोरी करने का गहरा संदेह
इस पूरे घालमेल को लेकर पीड़िता ने अपनी शिकायत में एक बड़ा सुराग भी पुलिस को दिया है। रश्मि ने बताया कि कुछ साल पहले उसने इंडियन ओवरसीज बैंक में अपना एक नया सेविंग अकाउंट खुलवाने के लिए आवेदन किया था। उस दौरान फॉर्म के साथ संलग्न करने के लिए उसने मोतीनगर मोहल्ले में स्थित जीजीआईसी स्कूल के पास संचालित एक कंप्यूटर कैफे में अपने पहचान पत्र और पैन कार्ड की फोटोकॉपी कराने के लिए मूल दस्तावेज दिए थे। पीड़िता का आरोप है कि इसके अलावा उसने कभी भी, कहीं भी अपने इन सरकारी दस्तावेजों की प्रतियां किसी को नहीं सौंपी। उसे पूरा अंदेशा है कि इसी कैफे संचालक ने उसके अभिलेखों (डॉक्यूमेंट्स) का गलत इस्तेमाल कर उसके नाम पर फर्जी फर्म बनाई और करोड़ों का ट्रांजेक्शन कर डाला।
पूरा परिवार दहशत में, साइबर पुलिस ने दी सफाई
घर में अचानक केंद्रीय एजेंसी का नोटिस पहुंचने के बाद से रश्मि के माता-पिता और भाई गहरे मानसिक तनाव में हैं। मजदूर पिता और बेरोजगार भाई को समझ नहीं आ रहा है कि वे इस भारी-भरकम कानूनी उलझन से कैसे बाहर निकलेंगे। पीड़िता ने जिला प्रशासन और साइबर विशेषज्ञों से मांग की है कि इस पूरे सिंडिकेट और जालसाजी की गहराई से उच्च स्तरीय जांच की जाए, ताकि असली अपराधी पकड़े जा सकें।
दूसरी तरफ, इस पूरे घटनाक्रम पर जिले के साइबर अपराध थाना प्रभारी राजेश मिश्र ने बताया कि फिलहाल उनके कार्यालय को इस संबंध में कोई आधिकारिक लिखित तहरीर या शिकायत सीधे प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने आश्वस्त किया है कि जैसे ही पीड़ित पक्ष का आवेदन उनके पास पहुंचेगा, साइबर सेल की तकनीकी टीम तुरंत मामले की जांच शुरू कर देगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अखिलेश यादव का संसद में बड़ा बयान, बोले- 'सरकार के साथ कोई डील तो नहीं हो गई?'
जिम्बाब्वे दौरा टीम इंडिया के लिए क्यों है खास? श्रेयस अय्यर की कप्तानी से नए चेहरों तक सब पर नजर
JPSC विवाद पर रांची में उबाल, BJYM कार्यकर्ताओं ने तोड़ी बैरिकेडिंग
15 साल पूरे होने पर 'सिंघम' को याद करना पड़ा भारी, अजय देवगन ट्रोलर्स के निशाने पर
शराब पीकर ड्राइविंग करना पड़ा भारी, पूर्व ऑस्ट्रेलियाई स्टार वॉर्नर ने कोर्ट में कबूला जुर्म
DGP की आपत्ति के बाद बड़ा फैसला, IPS सुमन गुप्ता का केंद्रीय डेपुटेशन NOC रद्द
दिल्ली में मेट्रो सेवा प्रभावित, 16 स्टेशन अगले आदेश तक रहेंगे बंद
बम धमाके में परिवार के 14 लोगों की मौत, चार साल बाद दो दोषियों को सजा