घर आएगी लक्ष्मी, खत्म होंगे पाप...चातुर्मास के पहले प्रदोष व्रत पर करें ये काम
ज्योतिषी गणना के अनुसार एक संवत में कुल 12 मास यानी 12 महीने होते हैं. चैत्र शुक्ल पक्ष से संवत की शुरुआत होती है जबकि आखिरी पक्ष चैत्र कृष्ण पक्ष का होता है. इन 12 मास में 4 महीने भगवान शिव का आधिपत्य होता है. आषाढ़ मास से शुरू होने वाले चातुर्मास में कुल चार मास होते हैं, जिसमें 8 प्रदोष व्रत का आगमन होता है. चातुर्मास आषाढ़ माह से शुरू होता है जो श्रावण मास, भाद्रपद मास और आश्विन मास तक चलता है. इस दौरान भगवान शिव ही पूरी सृष्टि का संचालन करते हैं. चातुर्मास का पहला प्रदोष व्रत आषाढ़ कृष्ण पक्ष में आता है. इस दिन भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए उनके मंत्र, स्तोत्र आदि का पाठ करना बेहद फलदायक होता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चातुर्मास के पहले प्रदोष व्रत पर यदि खास स्तोत्र का पाठ किया जाए तो आर्थिक तंगी और जाने अनजाने में किए सभी पाप खत्म हो जाते हैं.
चातुर्मास के पहले प्रदोष व्रत पर भगवान शिव की आराधना और किसी स्तोत्र का पाठ करने से लक्ष्मी का आगमन होगा, इस बारे में हरिद्वार के पंडित श्रीधर शास्त्री कहते हैं कि चातुर्मास का समय भगवान शिव को समर्पित होता है, जो आषाढ़ मास से शुरू होकर अश्विन मार्च तक रहता है. इस दौरान 8 प्रदोष व्रत का आगमन होता है. प्रदोष व्रत पर भगवान शिव की आराधना, पूजा पाठ, उनके मंत्र स्तोत्र और शिव पुराण का पाठ करना बेहद फलदायक होता है. साल 2026 में चातुर्मास का पहला प्रदोष व्रत 12 जुलाई रविवार को रोहिणी नक्षत्र में आ रहा है. इस दिन लक्ष्मी प्राप्ति के लिए शिव तांडव स्तोत्र का पाठ प्रदोष काल में श्रद्धा भक्ति भाव से किया जाए तो भोलेनाथ धन के भंडार सदैव के लिए भर देते हैं.
सिद्ध पीठ मंदिर में जाकर करें ये काम
पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि 12 जुलाई रविवार को रोहिणी नक्षत्र में होने वाली त्रयोदशी तिथि के दिन शिव तांडव स्तोत्र का पाठ शाम 05:45 से 07:15 के मध्य करने पर ही भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होगी. शिव तांडव स्तोत्र से भगवान शिव बेहद ही आसानी से प्रसन्न हो जाते हैं. इस दिन शिव तांडव स्तोत्र का पाठ श्रद्धा भक्ति भाव से करने पर लक्ष्मी प्राप्ति के साथ ही जाने अनजाने में किए हुए सभी पापों से मुक्ति मिल जाएगी और प्रदोष व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त हो जाएगा. पंडित शास्त्री बताते हैं कि शिव तांडव स्तोत्र का पाठ चातुर्मास के पहले प्रदोष व्रत पर अपने घर के देवालय या भोलेनाथ के सिद्ध पीठ मंदिर में जाकर कर सकते हैं. वैसे तो इस स्तोत्र का पाठ किसी भी समय करने पर लाभ मिलता है लेकिन प्रदोष काल में बताए गए समय पर स्तोत्र का पाठ करने पर कई गुना फल की प्राप्ति होती है.
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