FWICE प्रेसिडेंट का दिलजीत पर तीखा बयान, 'सतलुज' विवाद के बीच बढ़ी सियासत
दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' शुक्रवार को ही ओटीटी पर रिलीज हुई थी। दो दिन बाद इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। यह फिल्म पंजाब के एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित है। यह कहानी 1990 के दशक के उस अशांत दौर की है जब राज्य आतंकवाद से जूझ रहा था। ‘सतलुज’ फिल्म तीन साल से ज्यादा समय तक सेंसर बोर्ड के पास अटकी रही। लेकिन शुक्रवार को जी5 पर बिना किसी कट के रिलीज हुई इस फिल्म को रविवार शाम को प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। इस फिल्म को लेकर कई लोग अपनी राय जाहिर कर रहे हैं। इसी बीच फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एंप्लाॅइज के प्रेसिडेंट बीएन तिवारी ने दिलजीत दोसांझ पर बहुत कुछ कह दिया है।
दिलजीत दोसांझ को समझदारी से डिसीजन लेने चाहिए
फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एंप्लॉइज के प्रेसिडेंट बीएन तिवारी ने दिलजीत दोसांझ और उनकी फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर बातचीत में कहा, ‘मुझे बहुत हैरानी है कि दिलजीत दोसांझ विवादित फिल्में क्यों चुनते हैं। उन्हें ऐसे डिसीजन के असर को समझना चाहिए। वह पंजाब के सुपरस्टार हैं और उन्हें समझदारी से कोई डिसीजन लेने चाहिए, जिससे उनकी इमेज पर कोई असर न पड़े।’
वह आगे कहते हैं, ‘अगर कोई बात समाज में समस्या पैदा करती है, तो ऐसे कंटेंट की सावधानी से समीक्षा की जानी चाहिए। सिनेमा का मकसद मनोरंजन करना और कुछ जानकारी देना होता है। अगर सरकार बार-बार दखल देती है या सेंसर बोर्ड को कोई दिक्कत लगती है, तो इसका मतलब है कि फिल्म में कुछ ऐसे तत्व थे जो लोगों के देखने के लिए सही नहीं थे।’
फिल्म ‘सतलुज’ पर क्या है नजरिया?
बीएन तिवारी के मुताबिक फिल्म पर दोबारा विचार क्यों किया जा रहा है। वह कहते हैं, ‘मुझे समझ नहीं आ रहा कि इतने सारे कट्स और सेंसरशिप प्रोसेस से गुजरने के बाद भी फिल्म ‘सतलुज’ पर दोबारा विचार क्यों किया जा रहा है? सेंसर बोर्ड को शुरू से ही सभी चिंताओं पर ध्यान देना चाहिए था। एक बार मंजूरी मिलने के बाद फिल्म रिलीज हो जानी चाहिए, क्योंकि प्रोड्यूसर का बहुत सारा पैसा दांव पर लगा होता है।'
इस वजह से लिया गया फिल्म ‘सतलुज’ पर एक्शन
बता दें कि फिल्म ‘सतलुज’ को एक बड़ी वजह से ओटीटी से हटाया गया। एक सरकारी अधिकारी के मुताबिक फिल्म 'सतलुज' के मेकर्स ने 2022 में इसके ओरिजिनल टाइटल 'पंजाब 95' के तहत सेंसर सर्टिफिकेशन के लिए अप्लाई किया था, लेकिन उन्होंने सेंसर बोर्ड द्वारा सुझाए गए 127 कट्स को स्वीकार नहीं किया और फिल्म की रिलीज रोक दी।
अधिकारी के मुताबिक फिल्ममेकर्स सुझाए गए कट्स पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे थे और आखिरकार उन्होंने नए टाइटल के साथ ओटीटी पर चुपचाप फिल्म रिलीज कर दी। ओटीटी सेंसर बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। जब यह मामला सरकार के संज्ञान में आया, तो जी प्लेटफॉर्म से इसे हटाने के लिए कहा गया। अधिकारी ने कहा, ‘यह निर्देश सुरक्षा चिंताओं के कारण दिया गया था। ओटीटी प्लेटफॉर्म से गाइडलाइंस का पालन करने के लिए कहा गया था। अगर मेकर्स फिल्म को थिएटर और ओटीटी पर रिलीज करना चाहते हैं, तो उन्हें तय नियमों का पालन करना चाहिए।’
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