स्कूल बसों की टक्कर से मचा हड़कंप, बच्चों के सवार नहीं होने से टली बड़ी अनहोनी
जालंधर। पंजाब के जालंधर अंतर्गत नकोदर क्षेत्र में मंगलवार की सुबह एक बड़ा और भयावह सड़क हादसा होने से टल गया। सुबह के समय दो निजी स्कूलों की बसें अचानक आमने-सामने से बेहद तेज रफ्तार में टकरा गईं। यह भिड़ंत इतनी जोरदार थी कि टक्कर लगते ही एक बस अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पलट गई, जबकि दूसरी बस का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया। गनीमत यह रही कि दुर्घटना के वक्त दोनों ही बसें बच्चों को लेने के लिए स्कूल से निकली थीं और उनके भीतर एक भी छात्र मौजूद नहीं था, जिसके चलते एक बड़ा और जानलेवा हादसा होते-होते बच गया।
टक्कर लगते ही पलटी बस और मची भारी अफरा-तफरी
नकोदर के मुख्य मार्ग पर सुबह-सुबह हुए इस भीषण एक्सीडेंट की आवाज सुनकर आसपास के खेतों और घरों से बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण और राहगीर तुरंत मौके पर जमा हो गए। हाईवे पर पलटी हुई बस और दूसरी क्षतिग्रस्त गाड़ी को देखकर शुरुआत में चारों तरफ चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। लोगों को आशंका थी कि सुबह का समय होने के कारण बस के भीतर मासूम बच्चे फंसे हो सकते हैं, जिसके चलते ग्रामीणों ने बिना वक्त गंवाए तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया और बसों के शीशे तोड़कर भीतर दाखिल हुए।
खाली थीं दोनों बसें और सुरक्षित बच गए ड्राइवर
मौके पर पहुंचे प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों ने जब बसों के भीतर छानबीन की, तो उन्होंने राहत की सांस ली क्योंकि दोनों ही गाड़ियों की सीटें पूरी तरह खाली थीं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, दोनों स्कूल बसें अपने तय समय पर अलग-अलग गांवों और रिहायशी इलाकों से छात्रों को पिक करने के लिए ही रवाना हुई थीं। यदि इस भीषण टक्कर के दौरान बसों में स्कूली बच्चे सवार होते, तो यह दुर्घटना एक अत्यंत गंभीर और खौफनाक रूप ले सकती थी, जिसमें भारी जनहानि होने की पूरी आशंका थी।
स्थानीय पुलिस पहुंची मौके पर और शुरू की वैधानिक जांच
हादसे की सूचना मिलते ही नकोदर थाना पुलिस की टीम दलबल के साथ घटनास्थल पर सक्रिय हुई। पुलिस ने सबसे पहले दोनों बसों के चालकों और परिचालकों को सुरक्षित बाहर निकाला, जिन्हें मामूली चोटें आई थीं और उन्हें प्राथमिक उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल भेजा गया। इसके बाद पुलिस ने क्रेन की मदद से सड़क के बीचों-बीच पलटी हुई बस और मलबे को हटवाकर यातायात को सुचारू रूप से बहाल करवाया ताकि सुबह के समय अन्य वाहनों और दफ्तर जाने वाले लोगों को जाम का सामना न करना पड़े।
स्कूली वाहनों की रफ्तार और सुरक्षा मानकों पर फिर उठे सवाल
इस दुस्साहसिक टक्कर के बाद स्थानीय निवासियों और अभिभावकों ने स्कूल प्रशासनों के खिलाफ गहरा रोष प्रकट किया है। लोगों का आरोप है कि सुबह के समय सड़कों पर खाली होने के कारण स्कूल बसों के चालक अक्सर निर्धारित गति सीमा का उल्लंघन करते हैं और लापरवाही से गाड़ियां दौड़ाते हैं। ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन और परिवहन विभाग से मांग की है कि स्कूली वाहनों की फिटनेस, ड्राइवरों के लाइसेंस और उनकी गति पर कड़ा नियंत्रण रखा जाए ताकि भविष्य में ऐसे हादसों के कारण मासूम बच्चों की जान खतरे में न पड़े।
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