शिंदे बोले- सुप्रिया सुले समर्थन करें तो बेहतर, नहीं तो… बयान से बढ़ी सियासी हलचल
मुंबई। महाराष्ट्र की सियासत में परिसीमन विधेयक और विपक्षी गठबंधन के रुख को लेकर राजनीतिक हलचलें तेज हो गई हैं। शरद पवार गुट द्वारा इस विधेयक का समर्थन किए जाने की अटकलों के बीच राज्य के उप मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने एक बड़ा बयान दिया है। एकनाथ शिंदे ने स्पष्ट तौर पर कहा कि यदि सुप्रिया सुले की पार्टी इस महत्वपूर्ण विधेयक का समर्थन करती है तो यह बेहद सकारात्मक कदम होगा, लेकिन वर्तमान में उनका पूरा विपक्षी गठबंधन इस मुद्दे पर गहरे असमंजस की स्थिति में फंसा हुआ है।
विपक्ष की मजबूरी और महिला आरक्षण का हवाला
उप मुख्यमंत्री ने तंजिया लहजे में विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि देश और राज्य के विकास के लिए विपक्ष को परिसीमन विधेयक का समर्थन करना ही पड़ेगा, अन्यथा जनता खुद उनका पुरजोर विरोध करेगी। उन्होंने महिला आरक्षण का उदाहरण देते हुए कहा कि विपक्षी नेताओं को भली-भांति पता है कि यदि उन्होंने इसका विरोध किया तो उन्हें आम जनता के भारी आक्रोश का सामना करना पड़ेगा और उनकी स्थिति भी पश्चिम बंगाल जैसी हो जाएगी। शिंदे ने पूरे आत्मविश्वास के साथ दावा किया कि यह सभी महत्वपूर्ण विधेयक हर हाल में पारित होकर रहेंगे।
उद्धव गुट के सांसदों की बगावत और शिवसेना में विलय
इस महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एकनाथ शिंदे के साथ उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर आए चार सांसद भी मंच पर मौजूद रहे। उद्धव गुट में हुई इस बड़ी बगावत और सांसदों के अपनी पार्टी में शामिल होने पर प्रतिक्रिया देते हुए शिंदे ने कहा कि कुल छह सांसद दो-तिहाई बहुमत के साथ आधिकारिक तौर पर उनके साथ आ चुके हैं। इन सभी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष उपस्थित होकर निर्धारित कानूनी प्रक्रिया को पूरी प्रामाणिकता के साथ संपन्न किया है, जिसके बाद अब संसद में शिवसेना का वास्तविक बहुमत और ताकत काफी बढ़ चुकी है।
जयंत पाटील की मुलाकात और एनडीए का आंतरिक फैसला
शरद पवार के करीबी नेता जयंत पाटील की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से हुई मुलाकात पर बोलते हुए उप मुख्यमंत्री ने कहा कि हर मुलाकात को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि जब शरद पवार उनसे मिलने आए थे, तब कई लोगों के पेट में दर्द होने लगा था। उन्होंने साफ किया कि वे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के एक बेहद विश्वसनीय और मजबूत सहयोगी हैं, और गठबंधन में किसी नए दल को शामिल करने का अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के स्तर पर ही लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री पद की दावेदारी और एजेंडे पर रुख साफ
राज्य के सर्वोच्च पद यानी मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर चल रही बयानबाजी पर पूर्णविराम लगाते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा कि वर्तमान में महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद के लिए कोई भी रिक्ति उपलब्ध नहीं है। उन्होंने स्वीकार किया कि हर राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं की यह स्वाभाविक इच्छा होती है कि उनकी पार्टी का नेता मुख्यमंत्री बने, ठीक वैसे ही जैसे उनके कार्यकाल के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं को देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री होने की इच्छा थी। शिंदे ने कहा कि वे इन बातों का बिल्कुल बुरा नहीं मानते क्योंकि आज देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री हैं और वह खुद उप मुख्यमंत्री के रूप में राज्य के विकास के मुख्य एजेंडे पर मिलकर काम कर रहे हैं।
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