आवारा कुत्तों का कहर जारी, पूर्व सरपंच की मौत से पब्बियां में दहशत
जगराओं:पंजाब के जगराओं क्षेत्र में आवारा कुत्तों का जानलेवा आतंक रुकने का नाम नहीं ले रहा है, जिससे आम जनता का जीवन पूरी तरह असुरक्षित हो गया है। यहाँ के समीपवर्ती गांव पब्बियां में आधी रात को खूंखार आवारा कुत्तों के एक झुंड ने अस्सी वर्षीय पूर्व सरपंच जगदीश सिंह पर उस समय जानलेवा हमला बोल दिया, जब वे अपने ही खेत में बनी मोटर (डेरे) पर मौजूद थे। कुत्तों के इस हिंसक झुंड ने बुजुर्ग पर इतनी बेरहमी से हमला किया कि उन्हें संभलने या शोर मचाने का मौका तक नहीं मिला। अत्यधिक खून बह जाने और शरीर पर गहरे जख्म होने के कारण पूर्व सरपंच ने मौके पर ही तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। इस रूह कंपा देने वाली दर्दनाक घटना के बाद पूरे ग्रामीण क्षेत्र में भारी दहशत और गहरा आक्रोश व्याप्त हो गया है।
खेत की मोटर पर बाथरूम के लिए उठे थे बुजुर्ग, खुद का बचाव करने में रहे असमर्थ
प्राप्त प्राथमिक जानकारी के अनुसार, पूर्व सरपंच जगदीश सिंह रात के समय खेतों की रखवाली के लिए अपनी मोटर पर सो रहे थे। देर रात जब वे बाथरूम जाने के लिए अपनी खाट से उठे, तभी वहां पहले से घात लगाकर बैठे खूंखार कुत्तों के झुंड ने उन पर अचानक हमला कर दिया। अधिक उम्र और शारीरिक कमजोरी के कारण बुजुर्ग पूर्व सरपंच इन हिंसक जानवरों के सामने अपना बचाव करने में पूरी तरह असमर्थ रहे। कुत्तों ने उन पर इस कदर वहशियाना हमला किया कि उनके शरीर के अंगों को बुरी तरह क्षत-विक्षत कर दिया। सुबह जब परिजन और अन्य ग्रामीण मौके पर पहुंचे, तो वहां का खौफनाक मंजर देखकर सभी की आंखें नम हो गईं और पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया।
पंद्रह दिन के भीतर दूसरी मौत से सहमे ग्रामीण, शाम ढलते ही घरों में कैद होने को मजबूर
गांव पब्बियां में आवारा कुत्तों के कारण मौत का यह कोई पहला मामला नहीं है। महज पंद्रह दिन पहले ही इसी गांव में कुत्तों के इसी हिंसक झुंड ने बिहार के रहने वाले एक बेकसूर प्रवासी मजदूर को घेरकर उसे भी मौत के घाट उतार दिया था। आधे महीने के भीतर लगातार दो लोगों की दर्दनाक मौत ने पूरे इलाके के निवासियों के मन में गहरा खौफ पैदा कर दिया है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अब लोग रात के समय तो दूर, दिन के उजाले में भी अकेले खेतों की तरफ जाने या सुनसान रास्तों से गुजरने में थर-थर कांप रहे हैं। स्थिति यह हो गई है कि सूरज ढलते ही पूरा गांव एक अघोषित कर्फ्यू की तरह सन्नाटे में डूब जाता है और लोग खुद को घरों के भीतर बंद कर लेते हैं।
प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ फूटा गुस्सा, उग्र आंदोलन की दी चेतावनी
इस भयावह स्थिति को लेकर स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों ने नगर परिषद सहित जिला प्रशासन की लचर कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इससे पहले खुद जगराओं शहर में भी महज एक हफ्ते के भीतर अठारह से अधिक राहगीरों को आवारा कुत्तों ने काटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया था। ग्रामीणों ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि इन आदमखोर हो चुके कुत्तों को पकड़ने और नसबंदी के लिए तुरंत एक विशेष अभियान चलाया जाए। ग्रामीणों ने दोटूक चेतावनी दी है कि यदि सरकार और स्थानीय प्रशासन ने समय रहते इस जानलेवा समस्या का कोई स्थाई समाधान नहीं निकाला, तो वे मुख्य मार्गों को जाम कर प्रशासन के खिलाफ एक बड़ा और उग्र आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे।
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