Delimitation Bill का गणित, पास कराने के लिए किन पार्टियों पर भरोसा करेगी बीजेपी?
नई दिल्ली: आगामी लोकसभा चुनाव 2029 को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार परिसीमन के मुद्दे पर एक बड़ी और नई रणनीतिक तैयारी में जुट गई है। सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज है कि सरकार आगामी मानसून सत्र में एक संशोधित परिसीमन विधेयक पेश कर सकती है। इस नए विधेयक में देश के सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में करीब 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने का स्पष्ट प्रावधान शामिल किया जा सकता है। सरकार का यह कदम द्रमुक (DMK) और राकांपा (शरद पवार गुट) जैसे प्रमुख विपक्षी दलों की चिंताओं को दूर करने और इस ऐतिहासिक विधेयक को पारित कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत का समर्थन जुटाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इस रणनीति को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
सीटों के पुनर्वितरण और दक्षिण भारतीय राज्यों की चिंता का मुख्य विवाद
इस पूरे मामले की जड़ें अप्रैल में आयोजित संसद के विशेष सत्र से जुड़ी हैं, जब सरकार महिला आरक्षण के साथ परिसीमन विधेयक लेकर आई थी। उस समय लोकसभा सीटों के पुनर्वितरण के फॉर्मूले को लेकर भारी विवाद खड़ा हो गया था। तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके सहित दक्षिण भारत के कई दलों का तर्क है कि उनके राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण के मोर्चे पर शानदार काम किया है। ऐसे में यदि सीटों का निर्धारण केवल जनसंख्या के आधार पर किया गया, तो संसद में दक्षिण भारत की हिस्सेदारी घट जाएगी और उत्तर भारत के अधिक आबादी वाले राज्यों का प्रतिनिधित्व बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा। इसी असमानता के डर से दक्षिण के क्षेत्रीय दल इस नीति का कड़ा विरोध कर रहे हैं।
संसद में अमित शाह का आश्वासन और विपक्ष की कानूनी गारंटी की मांग
इस विवाद के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पहले संसद के पटल पर विपक्षी दलों को भरोसा दिया था कि परिसीमन के बाद किसी भी राज्य की वर्तमान सीटों की संख्या में कोई कमी नहीं की जाएगी, बल्कि सभी राज्यों में समान रूप से सीटों को 50 फीसदी तक बढ़ाया जाएगा। हालांकि, विपक्ष ने इसे केवल एक राजनीतिक बयानबाजी करार देते हुए मांग की थी कि इस आश्वासन को लिखित रूप में विधेयक का कानूनी हिस्सा बनाया जाना चाहिए। विपक्ष की इसी मांग पर बहस के दौरान गृह मंत्री ने एक घंटे के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित करने का अनुरोध किया था और एक संशोधित विधेयक लाने का वादा किया था।
शरद पवार गुट का रुख और किरेन रिजिजू के पुराने प्रस्ताव का हवाला
इस नए घटनाक्रम के बीच यह भी खबरें आ रही हैं कि बदले हुए प्रावधानों के बाद शरद पवार की राकांपा (NCP-SP) भी संसद में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के इस कदम का समर्थन कर सकती है। इस मुद्दे पर पार्टी की वरिष्ठ नेता सुप्रिया सुले ने रुख साफ करते हुए कहा कि एक बार नया विधेयक पटल पर आ जाए, तो पार्टी अगले 24 घंटे के भीतर अपने फैसले की घोषणा कर देगी। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पिछले परिसीमन विधेयक से ठीक पहले बजट सत्र के दौरान तत्कालीन केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी नेताओं को बैठक में बुलाकर आश्वस्त किया था कि देश के सभी राज्यों में 50 प्रतिशत सीटें बढ़ाई जाएंगी।
संविधान संशोधन के लिए सदन की स्थिति और जरूरी जादुई आंकड़ा
संसद के मौजूदा ढांचे और संविधान संशोधन के लिए आवश्यक विधायी शर्तों का विवरण नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट किया गया है:
| विवरण | संख्या / आवश्यक शर्त |
|---|---|
| लोकसभा के कुल वर्तमान सांसद | 540 (कुल 543 सीटों में से 3 रिक्त) |
| संविधान संशोधन के लिए जरूरी समर्थन | सदन में उपस्थित सदस्यों का दो-तिहाई (2/3) बहुमत तथा कुल संख्या का 360 |
सदन में एनडीए का वर्तमान संख्या बल और संभावित समीकरण
वर्तमान में सरकार के पास मौजूद सांसदों और उनका साथ दे रहे सहयोगी दलों की स्थिति इस प्रकार है:
| दल / राजनीतिक गुट | सांसदों की संख्या |
|---|---|
| एनडीए (मूल घटक दल) | 292 |
| तृणमूल कांग्रेस (TMC) | + 20 |
| शिवसेना (यूबीटी से अलग हुआ गुट) | + 6 |
| कुल संभावित संख्या | 318 |
विधेयक पास कराने के लिए भाजपा की नजर में शामिल अन्य क्षेत्रीय दल
जादुई आंकड़े (360) को छूने के लिए भाजपा की नजर संसद के उन 41 सांसदों पर टिकी है, जो फिलहाल विपक्ष या तटस्थ भूमिका में हैं। इन दलों का विवरण नीचे दिया गया है:
-
डीएमके (DMK): 22 सांसद (सबसे महत्वपूर्ण भूमिका में)
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एनसीपी - शरद पवार (NCP - SP): 08 सांसद
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वाईएसआर कांग्रेस (YSRCP): 04 सांसद
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झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM): 03 सांसद
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वीसीके (VCK): 02 सांसद
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आरएलपी (RLP): 01 सांसद
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शिरोमणि अकाली दल: 01 सांसद
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निर्दलीय व अन्य: (शेष आवश्यक संख्या इसमें शामिल है)
यदि ये क्षेत्रीय दल या इनके बड़े हिस्से संशोधित विधेयक के पक्ष में मतदान करते हैं, तो सरकार आसानी से लोकसभा में दो-तिहाई का आंकड़ा पार कर इस कानून को अमलीजामा पहना देगी।
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