आचार संहिता उल्लंघन में फंसे गुरनूर बरार, ICC ने चेतावनी के साथ दिया डिमेरिट अंक
बर्मिंघम: इंग्लैंड के खिलाफ एजबेस्टन के मैदान पर खेले गए पहले रोमांचक वनडे मुकाबले के दौरान भारतीय टीम के युवा तेज गेंदबाज गुरनूर बरार को आईसीसी (ICC) आचार संहिता के उल्लंघन का दोषी पाया गया है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए भारतीय पेसर को आधिकारिक तौर पर चेतावनी जारी की है, साथ ही उनके खाते में एक डिमेरिट अंक (Demerit Point) भी जोड़ दिया है। यह कार्रवाई मैच के दौरान उनके आक्रामक और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार को लेकर की गई है।
मैच के आठवें ओवर में घटी थी यह अप्रिय घटना
आईसीसी द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह पूरी घटना 14 जुलाई को इंग्लैंड की पारी के आठवें ओवर के दौरान घटित हुई। गेंदबाजी और फील्डिंग के दौरान गुरनूर बरार ने फील्ड पर मुस्तैदी दिखाते हुए अचानक गेंद को उठाया और बिना किसी जरूरत के क्रीज पर मौजूद अंग्रेजी बल्लेबाज की तरफ बेहद तेज और खतरनाक तरीके से थ्रो कर दिया। अंपायरों ने उनके इस बर्ताव को खेल भावना के विपरीत और बल्लेबाज के लिए शारीरिक रूप से नुकसानदेह माना, जिसके बाद इस मामले को रेफरी के पास भेजा गया।
आईसीसी के कड़े नियम 'अनुच्छेद 2.9' के तहत दर्ज हुआ मामला
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क्या कहता है नियम: युवा तेज गेंदबाज गुरनूर बरार को आईसीसी की आचार संहिता के अनुच्छेद 2.9 का उल्लंघन करने का दोषी ठहराया गया है।
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गेंदबाजों के लिए सख्त हिदायत: यह नियम विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय मैचों के दौरान मैदान पर किसी भी खिलाड़ी, अंपायर या सहायक स्टाफ की दिशा में अनुचित, आक्रामक या खतरनाक तरीके से गेंद फेंकने को प्रतिबंधित करता है, जिससे किसी को चोट लगने का खतरा हो।
युवा गेंदबाज ने बिना किसी बहस के कबूल की अपनी गलती
क्रिकेट की सर्वोच्च संस्था ने स्पष्ट किया है कि आरोपी गेंदबाज गुरनूर बरार ने मैच के बाद अपनी इस गंभीर मानवीय भूल को स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही उन्होंने एमिरेट्स आईसीसी एलीट पैनल के मैच रेफरी रिची रिचर्डसन द्वारा दी गई इस सजा को बिना किसी विरोध के मंजूर भी कर लिया है। खिलाड़ी द्वारा गलती मानने के कारण इस मामले में किसी भी तरह की औपचारिक या लंबी सुनवाई की जरूरत नहीं पड़ी। पिछले 24 महीनों के भीतर बरार के करियर का यह पहला आचार संहिता उल्लंघन है, जिसके कारण उनके अनुशासनात्मक रिकॉर्ड में यह पहला डिमेरिट अंक दर्ज किया गया है।
मैदान पर मौजूद अंपायरों की चौकसी से खुली पोल
मैदानी अंपायरों की पैनी नजर के कारण ही यह मामला तुरंत रिकॉर्ड में लिया गया। गुरनूर बरार के खिलाफ यह आधिकारिक शिकायत ऑन-फील्ड अंपायर कुमार धर्मसेना और माइक बर्न्स, टीवी (तीसरे) अंपायर सैम नोगज्स्की और चौथे अंपायर रसेल वॉरेन द्वारा संयुक्त रूप से दर्ज कराई गई थी।
लेवल-1 के उल्लंघन में नियमों के तहत क्या सजा मिल सकती है?
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न्यूनतम से अधिकतम सजा: आईसीसी की नियमावली के अनुसार, लेवल-1 के श्रेणी वाले उल्लंघनों में दोषी पाए जाने पर खिलाड़ी को एक लिखित आधिकारिक चेतावनी दी जाती है।
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आर्थिक और अनुशासनात्मक दंड: इसके अलावा परिस्थितियों को देखते हुए खिलाड़ी की उस मैच की फीस का अधिकतम 50 प्रतिशत तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और उनके खाते में एक या दो डिमेरिट अंक जोड़े जा सकते हैं।
क्या है आईसीसी का 'डिमेरिट पॉइंट' सिस्टम?
आईसीसी के अनुशासन नियमों के मुताबिक, यदि कोई भी खिलाड़ी लगातार मैदान पर आक्रामक व्यवहार करता है और पिछले 24 महीनों के समय चक्र में उसके खाते में 4 या उससे अधिक डिमेरिट अंक जमा हो जाते हैं, तो उन्हें तत्काल प्रभाव से 'सस्पेंशन अंक' (निलंबन) में बदल दिया जाता है। दो सस्पेंशन अंक का मतलब है कि उस खिलाड़ी पर स्वतः ही एक टेस्ट मैच या फिर दो वनडे/टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों का प्रतिबंध लग जाता है। ये डिमेरिट अंक किसी भी खिलाड़ी के रिकॉर्ड में दर्ज होने की तारीख से अगले 24 महीनों तक सक्रिय रहते हैं और समय सीमा पूरी होने पर अपने आप हट जाते हैं।
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