जेल में बंद शिक्षक को ट्रेनिंग का बुलावा! MP में शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर
छिंदवाड़ा। जिले के तामिया स्थित संदीपनी विद्यालय और विकासखंड शिक्षा कार्यालय एक बार फिर अपनी कार्यप्रणाली को लेकर विवादों के घेरे में आ गए हैं। इस बार मामला बेहद गंभीर है, जहां शिक्षा विभाग द्वारा जारी सिकल सेल प्रशिक्षण की सूची में एक ऐसे शिक्षक का नाम शामिल कर दिया गया, जो पिछले दो वर्षों से वित्तीय घोटाले के आरोप में जेल में बंद है। इस लापरवाही ने प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोल दी है, क्योंकि इस आदेश पर ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं।
जेल में बंद शिक्षक का नाम प्रशिक्षण सूची में
मामला तब प्रकाश में आया जब संकुल लहगड़ुआ में सिकल सेल प्रशिक्षण के लिए शिक्षकों की सूची जारी हुई। इस सूची के चौथे क्रम पर उस शिक्षक का नाम अंकित है, जो तामिया में हुए 43 लाख रुपये के वित्तीय अनियमिता मामले में आरोपी है। शिक्षा विभाग की ओर से न केवल नाम शामिल किया गया, बल्कि संबंधित शिक्षक को निर्धारित समय पर प्रशिक्षण में अनिवार्य उपस्थिति के निर्देश भी दे दिए गए। सरकारी रिकॉर्ड की इस बड़ी चूक ने पूरे शिक्षा महकमे में हड़कंप मचा दिया है और विभागीय अधिकारियों की कार्यकुशलता पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।
43 लाख रुपये के घोटाले का है मामला
यह पूरा घटनाक्रम जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत हुए उस चर्चित घोटाले से जुड़ा है, जिसमें सरकारी राशि को निजी खातों में स्थानांतरित किया गया था। इस मामले में तत्कालीन जिला प्रशासन के निर्देश पर एक अधिकारी, एक सेवानिवृत्त कर्मचारी और दो बाबुओं सहित कुल छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस प्रकरण के मुख्य आरोपी शिक्षक हरिप्रसाद पंद्रे को पहले ही निलंबित किया जा चुका है और वह वर्तमान में जेल की सजा काट रहा है। इसके बावजूद प्रशिक्षण सूची में उसका नाम आना एक बड़ा प्रशासनिक सवाल खड़ा करता है।
बीईओ की सफाई और प्रशासनिक जवाबदेही
विवाद बढ़ने के बाद बीईओ बी.के. सानेर ने अपना बचाव करते हुए कहा कि प्रशिक्षण सूची उनके कार्यालय द्वारा नहीं, बल्कि सिकल सेल विभाग की ओर से प्राप्त हुई थी। उन्होंने सूची की जांच कराने और त्रुटि सुधारने का आश्वासन दिया है। हालांकि, सवाल यह है कि बिना किसी विभागीय सत्यापन के, एक जिम्मेदार अधिकारी ने कैसे इतने गंभीर आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए। इस लापरवाही ने एक बार फिर प्रशासनिक तंत्र की सतर्कता पर सवाल खड़े कर दिए हैं और अब इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है।
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