जमशेदपुर: लंबी दूरी तय करने वाले रेल यात्रियों के लिए एक बेहद शानदार और बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। झारखंड के प्रमुख औद्योगिक शहर टाटानगर को निकट भविष्य में दो नई अत्याधुनिक स्लीपर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों का तोहफा मिलने जा रहा है। इन हाई-स्पीड ट्रेनों के पटरी पर उतरने से यात्रियों को तीव्र गति के साथ-साथ विश्वस्तरीय और बेहद आरामदायक सफर का अहसास होगा। दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए टाटानगर से देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और धर्मनगरी वाराणसी के लिए इन स्लीपर ट्रेनों को चलाने का एक विस्तृत प्रस्ताव अंतिम मंजूरी के लिए रेलवे बोर्ड को भेज दिया है।

देश के दो प्रमुख महानगरों के लिए जुड़ेंगी हाई-स्पीड ट्रेनें

रेलवे द्वारा तैयार किए गए ब्लूप्रिंट के अनुसार, पहली स्लीपर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन पश्चिम बंगाल के शालिमार स्टेशन से मुंबई के बीच परिचालित की जाएगी। यह ट्रेन टाटानगर और चक्रधरपुर मंडल होते हुए झारखंड, ओडिशा तथा छत्तीसगढ़ के रास्ते महाराष्ट्र तक का सफर तय करेगी, जिससे विभिन्न राज्यों के बीच व्यापारिक और सामाजिक संपर्क मजबूत होगा। वहीं, दूसरी बहुप्रतीक्षित स्लीपर वंदे भारत ट्रेन सीधे टाटानगर से वाराणसी के बीच चलाई जाएगी, जिसका खाका वर्ष 2024 में ही खींच लिया गया था, लेकिन तकनीकी कारणों से इसे तब अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका था। अब इस रूट पर ट्रेन शुरू होने से झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश के यात्रियों को वाराणसी आने-जाने में अभूतपूर्व सुगमता होगी।

रखरखाव के लिए 283 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा नया डिपो

इन अत्याधुनिक ट्रेनों के सफल और सुरक्षित संचालन को जमीन पर उतारने के लिए रेलवे बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में जुट गया है। टाटानगर में करीब 283 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से एक सर्वसुविधायुक्त और आधुनिक कोचिंग डिपो का निर्माण करने की मंजूरी दी गई है। यह नया डिपो भविष्य में स्लीपर वंदे भारत जैसी आधुनिक और हाई-टेक ट्रेनों के तकनीकी रखरखाव, प्राथमिक जांच और साफ-सफाई में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। वर्तमान में टाटानगर स्टेशन पर केवल एक वाशिंग लाइन उपलब्ध है, जो मौजूदा ट्रेनों के लिए नाकाफी साबित हो रही थी, लेकिन इस नए प्रोजेक्ट के पूरा होते ही बुनियादी ढांचे से जुड़ी सभी अड़चनें स्थाई रूप से दूर हो जाएंगी।

पूर्वी भारत के बड़े रेल हब के रूप में उभरेगा टाटानगर

इन दो नई प्रीमियम स्लीपर ट्रेनों की शुरुआत के साथ ही टाटानगर रेलवे स्टेशन की साख और पहचान पूर्वी भारत के एक विशाल और प्रमुख रेल हब के रूप में स्थापित हो जाएगी। बुनियादी ढांचे के पुनर्विकास और आधुनिकीकरण के बाद इस स्टेशन से देश के अन्य सुदूर कोनों के लिए भी नई ट्रेनें खोलने का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा। इस विस्तार से न केवल जमशेदपुर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों के व्यवसायियों को लाभ होगा, बल्कि पर्यटन और रोजगार के दृष्टिकोण से भी यह समूचे क्षेत्र के विकास में एक मील का पत्थर साबित होगा।

स्टेशन से गुजरने वाली वंदे भारत ट्रेनों की संख्या बढ़कर होगी पांच

वर्तमान रेल नेटवर्क की बात करें तो अभी टाटानगर से पटना और ब्रह्मपुर के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस का सफल संचालन किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, रांची-हावड़ा और राउरकेला-हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें भी सप्ताह में छह दिन टाटानगर स्टेशन से होकर अपनी मंजिल की तरफ गुजरती हैं। रेलवे बोर्ड से नया प्रस्ताव पास होने और दोनों नई स्लीपर वंदे भारत ट्रेनों के जुड़ जाने के बाद टाटानगर से सीधे तौर पर जुड़ने वाली वंदे भारत ट्रेनों की कुल संख्या बढ़कर पांच हो जाएगी। यह विस्तार भारतीय रेलवे के मानचित्र पर टाटानगर की अहमियत को कई गुना बढ़ा देगा।