मोक्षस्थली कौलेश्वरी को चाहिए संरक्षण, पर्यटकों ने सरकार से दिखाई उम्मीद
कौलेश्वरी पर्वत पर विदेशी पर्यटकों ने किया दर्शन और पूजा
हंटरगंज (चतरा)। भगवान बुद्ध की तपोभूमि माने जाने वाले कौलेश्वरी पर्वत पर चिकित्सा और उच्च शिक्षा की सुविधाएं बहाल करने की योजना पर म्यांमार और थाइलैंड सरकार विचार कर सकती हैं। इसके लिए भूमि उपलब्ध कराए जाने की शर्त रखी गई है।
विदेशी पर्यटकों का एक 20 सदस्यीय दल मंगलवार सुबह कौलेश्वरी पर्वत पहुंचा। दल का नेतृत्व म्यांमार की महिला धर्मगुरु साधना ज्ञानी कर रही थीं। स्वागत कौलेश्वरी विकास प्रबंधन समिति के सदस्य अमरेंद्र कुमार केसरी और जितेंद्र कुमार सिंह ने किया।
दल ने पर्वत पर दर्शन-पूजन के साथ बुद्धा पार्क का निरीक्षण किया और स्थानीय अंचल अधिकारी से भी मुलाकात की। इस दौरान साधना ज्ञानी ने कहा कि यदि प्रशासन आवश्यक भूमि उपलब्ध कराता है तो म्यांमार और थाइलैंड सरकार संयुक्त रूप से साधना केंद्र, चिकित्सालय और उच्च शिक्षा केंद्र स्थापित करने पर विचार कर सकती हैं।
पर्यटकों ने पर्वत की उपेक्षा पर नाराजगी जताई और कहा कि यहां की ऐतिहासिक धरोहर और संस्कृति के संरक्षण के लिए सरकार को गंभीरता दिखानी चाहिए।
कौलेश्वरी को मोक्ष प्राप्ति का पवित्र स्थल माना जाता है। बौद्ध धर्मावलंबी यहां बाल-नाखून दान करने के साथ जीते-जी अंतिम संस्कार भी करते हैं। यह स्थल बौद्ध, हिंदू और जैन धर्मों का संगम स्थल भी है।
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