बीड, हिंगोली, धाराशिव, परभणी और लातूर में कुनबी प्रमाणपत्र वितरण पर सियासत गर्माई; अजित पवार-फडणवीस की ‘दूरी’ पर नजरें
बीड : महाराष्ट्र सरकार ने बुधवार को मराठा समुदाय के युवाओं को कुनबी जाति प्रमाण पत्र सौंपने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी। मराठवाड़ा मुक्ति दिवस के आधिकारिक समारोह के दौरान मराठवाड़ा क्षेत्र के आठ में से पांच ज़िलों में यह वितरण किया गया। यह कदम आरक्षण के लिए लंबे आंदोलन के बाद उठाया गया है। मनोज जरांगे के आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने मराठा युवाओं को कुनबी जाति प्रमाण पत्र देने का फैसला किया था। इन पांच ज़िलों के युवाओं ने प्रमाण पत्र दिए गए तो उन्होंने इसका श्रेय आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे को दिया। इन प्रमाण पत्रों से मराठों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी में शामिल किया जा सकेगा, जिससे वे शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ उठा सकेंगे।
बीड में अजित पवार ने बांटे प्रमाणपत्र
बीड में, मुक्ति दिवस कार्यक्रम के बाद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने मराठा समुदाय के युवाओं को प्रमाण पत्रों का पहला बैच स्वयं सौंपा। अन्य ज़िलों में भी इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित किए गए। जिलों के संरक्षक मंत्रियों ने ये प्रमाणपत्र वितरण किए।
पालक मंत्रियों ने अपने जिलों में दिए सर्टिफिकेट
हिंगोली के संरक्षक मंत्री नरहरि ज़िरवाल, परभणी के संरक्षक मंत्री मेघना बोर्डिकर, धाराशिव के संरक्षक मंत्री प्रताप सरनाईक और लातूर के संरक्षक मंत्री शिवेंद्रराजे भोंसले ने अपने-अपने जिलों में युवाओं को प्रमाण पत्र सौंपे। जिरवाल ने कहा कि फ़िलहाल, मैं यह नहीं कह सकता कि ये कुनबी प्रमाणपत्र कानूनी जांच में टिक पाएंगे या नहीं। ये प्रमाणपत्र जारी हो चुके हैं और निश्चित रूप से जांच प्रक्रिया से गुज़रे होंगे। मेरे लिए यह अनुमान लगाना अनुचित होगा कि कानूनी तौर पर इनका क्या होगा। अधिकारियों ने कहा कि यह प्रतीकात्मक था, जिससे प्रमाणपत्र वितरण अभियान की आधिकारिक शुरुआत हुई। आने वाले दिनों में स्थानीय प्रशासनिक कार्यालयों के माध्यम से पूर्ण पैमाने पर प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे।
देवेंद्र फडणवीस ने बनाई दूरी
हालांकि, छत्रपति संभाजीनगर, जालना और नांदेड़ ज़िलों में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री पंकजा मुंडे और ओबीसी कल्याण मंत्री अतुल सावे जैसे वरिष्ठ राजनेताओं की मौजूदगी के बावजूद, मुक्ति दिवस समारोहों के दौरान सार्वजनिक रूप से कोई कुनबी प्रमाणपत्र वितरित नहीं किया गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि इन ज़िलों में प्रमाणपत्र वितरण की प्रक्रिया जल्द ही शुरू की जाएगी, लेकिन बुधवार के कार्यक्रम केवल आधिकारिक समारोहों तक ही सीमित रहे।
राजनीतिक रूप में अहम कदम
कुनबी प्रमाणपत्रों के वितरण को राजनीतिक रूप से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, खासकर मराठवाड़ा में, जहां आरक्षण की मांग ज़ोरदार रही है। सरकार का यह निर्णय महीनों तक चले विरोध प्रदर्शनों, भूख हड़तालों और कार्यकर्ता मनोज जरांगे के नेतृत्व में मराठा समुदाय के नेताओं के साथ बातचीत के बाद आया है।
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