ISRO से जुड़े मजदूरों को स्थायी करने का सुप्रीम आदेश
नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के 'लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर' (LPSC) में वर्षों से कार्यरत दिहाड़ी मजदूरों के पक्ष में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने महेंद्रगिरि स्थित इस केंद्र में काम करने वाले श्रमिकों की सेवाओं को तत्काल नियमित करने का आदेश देते हुए प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि संबंधित अधिकारी पूर्व में दिए गए न्यायिक आदेशों को लागू करने में विफल रहे और मजदूरों के स्थायीकरण में लापरवाही बरती गई।
दशकों पुराने संघर्ष पर न्याय की मुहर
यह कानूनी लड़ाई 1991 से 1997 के बीच एलपीएससी में लोडिंग और अनलोडिंग जैसे कार्यों के लिए नियुक्त किए गए दिहाड़ी मजदूरों द्वारा लड़ी जा रही थी। इन श्रमिकों ने 'गैंग लेबरर्स कार्य योजना 2012' को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जो उन्हें स्थायी करने के बजाय केवल अस्थायी राहत प्रदान कर रही थी। मद्रास हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद मामला देश की सबसे बड़ी अदालत पहुँचा। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि प्रशासन की 2012 की योजना केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) और उच्च न्यायालय के पुराने फैसलों का उल्लंघन करती है।
चार सप्ताह में नियमितीकरण का अल्टीमेटम
शीर्ष अदालत ने अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए निर्देश दिया है कि सभी याचिकाकर्ताओं को 9 सितंबर 2010 से प्रभावी रूप से स्थायी कर्मचारी माना जाए। पीठ ने प्रशासन को इस पूरी प्रक्रिया को संपन्न करने के लिए केवल चार सप्ताह की समयसीमा दी है। अदालत ने यह भी साफ कर दिया कि इस फैसले का लाभ केवल याचिकाकर्ताओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उसी योजना के तहत समान परिस्थितियों में काम करने वाले सभी कर्मचारी इसके पात्र होंगे।
आदर्श नियोक्ता बने सरकार: सुप्रीम कोर्ट
फैसला सुनाते समय शीर्ष अदालत ने कड़े शब्दों में कहा कि राज्य अपनी शक्ति का उपयोग कर्मचारियों के साथ मनमाना व्यवहार करने के लिए नहीं कर सकता। अदालत ने टिप्पणी की कि सरकार को एक 'आदर्श नियोक्ता' की भूमिका निभानी चाहिए, न कि अपने ही कर्मचारियों के अधिकारों का हनन करना चाहिए। इस आदेश के बाद अब इसरो के एलपीएससी में वर्षों से अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहे दर्जनों मजदूरों को सम्मानजनक सेवा और स्थायी रोजगार प्राप्त हो सकेगा।
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