"अकाली दल के सीनियर नेता बिक्रम मजीठिया के घर पुलिस की रेड; हिरासत से वर्कर छुड़ाने के मामले में केस दर्ज"
अमृतसर। शिरोमणि अकाली दल के कद्दावर नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मजीठा थाने से एक अकाली कार्यकर्ता को कथित तौर पर जबरन छुड़ाकर ले जाने के मामले में पुलिस ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। इस एफआईआर (नंबर 91) के दर्ज होने के बाद सोमवार को पंजाब पुलिस की कई टीमों ने अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इसी कड़ी में एक विशेष टीम मजीठिया के अमृतसर स्थित निवास स्थान पर भी पहुंची और पूरे परिसर की तलाशी ली, हालांकि उस वक्त घर पर कोई भी सदस्य मौजूद नहीं था।
थाने के बाहर हुआ था भारी हंगामा और नोकझोंक
इस पूरे विवाद की शुरुआत रविवार को उस समय हुई थी, जब अकाली दल के नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके एक कार्यकर्ता जोबनप्रीत सिंह को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखा है। अकाली दल का दावा था कि जोबनप्रीत को मुख्य थाना परिसर में रखने के बजाय थाना प्रभारी (एसएचओ) के सरकारी आवास के एक कमरे में बंद किया गया था। इस बात की भनक लगते ही बिक्रम सिंह मजीठिया अपने भारी लाव-लश्कर के साथ मजीठा थाना पहुंचे, जहां पुलिस प्रशासन और अकाली समर्थकों के बीच जमकर नोकझोंक और तीखी बहस हुई। इसके बाद समर्थक उक्त कार्यकर्ता को अपने साथ ले गए।
सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में केस दर्ज
इस घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए पुलिस प्रशासन ने सरकारी ड्यूटी में बाधा पहुंचाने, कानूनी प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने और पुलिस कस्टडी से एक व्यक्ति को छुड़ाकर ले जाने की धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। इस मामले में मुख्य रूप से पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया को नामजद किया गया है। सोमवार को जब पुलिस टीम तफ्तीश के लिए मजीठिया के घर पहुंची, तो वहां बड़ी तादाद में अकाली कार्यकर्ता जमा हो गए और पुलिसिया कार्रवाई का विरोध करने लगे। इस दौरान माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया और अधिकारियों व कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहसबाजी देखने को मिली।
अकाली दल का पलटवार और सांसद हरसिमरत कौर का बयान
दूसरी तरफ, शिरोमणि अकाली दल ने इस पूरी कार्रवाई को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीति से प्रेरित और बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया है। मजीठिया के घर हुई छापेमारी पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए बठिंडा से अकाली सांसद हरसिमरत कौर बादल ने राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सूबे के मुख्यमंत्री आखिर मजीठिया से इतना क्यों घबराते हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि आम जनता की सुरक्षा करने वाली पुलिस आज सरकार के अहंकार को पूरा करने का जरिया बन चुकी है। हरसिमरत कौर ने दलील दी कि मजीठिया ने सिर्फ एक निर्दोष कार्यकर्ता को गैर-कानूनी हिरासत से बचाकर उसकी जान बचाई है, इसलिए मुकदमा उन पुलिसकर्मियों पर होना चाहिए जिन्होंने उसे अवैध रूप से बंद कर रखा था।
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