'मटन टैक्स' पर सियासी संग्राम, सीएम उमर ने पंजाब सरकार को लिखा सख्त पत्र
श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को केंद्र शासित प्रदेश के मटन (गोश्त) कारोबारियों के हक में एक बड़ा बयान देते हुए पंजाब सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा है कि पड़ोसी राज्य पंजाब द्वारा मटन व्यापारियों पर लगाया गया नया टैक्स पूरी तरह से अनुचित और तर्कहीन है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर जम्मू-कश्मीर प्रशासन बेहद संवेदनशील है और व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए इस मामले को पंजाब सरकार के सामने बेहद मुस्तैदी और कड़ाई से उठाया गया है। श्रीनगर के डल झील किनारे स्थित शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एसकेआईसीसी) में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने इस सीमा पार कर विवाद पर अपनी सरकार की रणनीति साझा की।
महीनों पहले व्यक्तिगत तौर पर उठाई थी आवाज, अब समाधान के लिए फिर दी चेतावनी
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने खुलासा किया कि यह कोई नया मामला नहीं है और वे इस समस्या को लेकर पहले से ही सक्रिय हैं। उन्होंने बताया कि कई महीने पहले ही उन्होंने इस टैक्स के लागू होने के समय व्यक्तिगत रूप से पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से मुलाकात कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। मुख्यमंत्री ने चिंता जताते हुए कहा कि लंबे समय से इस दिशा में कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया है, जिसके कारण घाटी के व्यापारियों पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी के चलते अब जम्मू-कश्मीर सरकार ने एक बार फिर औपचारिक रूप से कड़ा पत्र लिखकर पंजाब प्रशासन से इस विवादित टैक्स को तुरंत वापस लेने और मामले का स्थाई समाधान निकालने की पुरजोर मांग की है।
घाटी के मटन कारोबार को बचाने की कोशिश, आम जनता की जेब पर असर का डर
दरअसल, जम्मू-कश्मीर में मटन की भारी खपत है और यहाँ की एक बड़ी आबादी इस व्यवसाय से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई है। पंजाब के रास्ते आने वाले इस माल पर अतिरिक्त टैक्स लगाए जाने से न केवल व्यापारियों का मुनाफा घट रहा है, बल्कि आम उपभोक्ताओं के लिए भी मटन की कीमतें बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि उनकी सरकार घाटी के स्थानीय कारोबारियों को किसी भी हाल में आर्थिक नुकसान नहीं झेलने देगी और पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय बनाकर इस टैक्स नीति में सुधार कराने के लिए हर संभव कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाएगी ताकि व्यापार सुचारू रूप से चलता रहे।
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