हॉकर लाइसेंस घोटाले पर हाईकोर्ट सख्त: फर्जी शपथपत्र, एक परिवार को कई लाइसेंस और फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र पर होगी कार्रवाई
मुंबई : जुलाई के अंत तक बनेगी शिकायत निवारण समिति, राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को दिया आश्वासन
राज्य सरकार ने मंगलवार को बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया कि स्ट्रीट वेंडर्स (जीविका संरक्षण एवं सड़क विक्रय विनियमन) अधिनियम, 2014 के तहत हॉकरों की शिकायतों के निवारण के लिए जुलाई 2026 के अंत तक शिकायत निवारण समिति (Grievance Redressal Committee) का गठन कर दिया जाएगा। न्यायालय ने कहा कि कानून का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है।
99,400 हॉकरों में से केवल 47,700 को मिले QR कोड, हजारों अब भी संपर्क से बाहर...
सुनवाई के दौरान बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने न्यायालय को बताया कि मुंबई में कुल 99,400 पात्र हॉकरों का रिकॉर्ड उपलब्ध है। इनमें से अब तक 47,700 हॉकरों को QR कोड जारी किए जा चुके हैं, जबकि 48,000 से अधिक हॉकर बार-बार प्रयास करने के बावजूद संपर्क में नहीं आए। बीएमसी ने यह भी बताया कि 25,000 से अधिक हॉकरों से अब तक किसी भी प्रकार का संपर्क स्थापित नहीं हो पाया है, जिससे सत्यापन प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
'एक परिवार-एक लाइसेंस' नीति के उल्लंघन पर हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी...
माननीय न्यायालय ने सुनवाई के दौरान 'एक परिवार-एक लाइसेंस' नीति के उल्लंघन पर गंभीर चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने बीएमसी को निर्देश दिया कि वर्ष 2014 के अधिनियम का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए और अपात्र लाभार्थियों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की जाए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कानून का उद्देश्य वास्तविक जरूरतमंद हॉकरों को संरक्षण देना है, न कि नियमों का दुरुपयोग करने वालों को।
अधिवक्ता आशीष दुबे की याचिका पर पुलिस रिपोर्ट में आरोप सही पाए गए...
याचिकाकर्ता अधिवक्ता आशीष दुबे द्वारा उठाए गए मुद्दों पर गोरेगांव पुलिस ने अपनी जांच रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की। रिपोर्ट में आरोपों को सही माना गया है। जांच में सामने आया कि एक ही परिवार के तीन-तीन सदस्यों को हॉकर लाइसेंस जारी किए गए, जबकि संबंधित लोग पहले से दुकान संचालक हैं तथा कई संपत्तियों के मालिक भी हैं। आरोप है कि इन लोगों ने महत्वपूर्ण तथ्य छिपाकर और झूठे शपथपत्र दाखिल कर पात्रता सूची में अपना नाम शामिल कराया।
55 परिवारों के 129 हॉकर फर्जी शपथपत्र देकर बने पात्र...
पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ कि 55 परिवारों के कुल 129 हॉकरों ने झूठे शपथपत्र दाखिल कर स्वयं को पात्र घोषित कराया। बीएमसी ने भी न्यायालय के समक्ष स्वीकार किया कि इन मामलों में धोखाधड़ी हुई है। इन तथ्यों को गंभीर मानते हुए न्यायालय ने संबंधित हॉकरों के लाइसेंस रद्द कर नियमानुसार कठोर कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने कहा— सुरक्षा केवल पात्र हॉकरों को मिले
माननीय न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कानूनी संरक्षण और सुविधाएं केवल पात्र हॉकरों को ही मिलनी चाहिए। अपात्र व्यक्तियों या एक ही परिवार के अनेक सदस्यों को कानून का लाभ नहीं दिया जा सकता। न्यायालय ने प्रशासन को इस दिशा में प्रभावी कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र से लाइसेंस लेने का मामला भी आया सामने...
सुनवाई के दौरान एक और गंभीर मामला न्यायालय के समक्ष रखा गया। जानकारी दी गई कि एक हॉकर ने उत्तर प्रदेश से 50 प्रतिशत दिव्यांगता का प्रमाणपत्र प्राप्त कर हॉकर लाइसेंस हासिल किया, जबकि प्रथम दृष्टया वह किसी भी प्रकार से दिव्यांग प्रतीत नहीं होता। इस पर न्यायालय ने अधिवक्ता आशीष दुबे को इस संबंध में विस्तृत शपथपत्र दाखिल करने तथा उसकी प्रति आगे की कार्रवाई के लिए बीएमसी को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
हॉकर शिकायत चैटबॉट पर उठे सवाल, व्हाट्सएप प्लेटफॉर्म अपनाने का सुझाव...
हॉकरों की शिकायतों के निवारण के लिए शुरू की गई चैटबॉट सेवा की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए। बताया गया कि चैटबॉट समय पर जवाब नहीं दे रहा और शिकायतों के समाधान में अत्यधिक विलंब हो रहा है। इस पर न्यायालय ने राज्य सरकार को सुझाव दिया कि शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए व्हाट्सएप आधारित प्रणाली अपनाने की संभावना पर विचार किया जाए।
नॉन-हॉकिंग जोन पर भी अतिक्रमण का मुद्दा उठा
सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी उठाया गया कि एक घोषित नॉन-हॉकिंग जोन वाली सड़क के दोनों ओर हॉकरों का कब्जा बना हुआ है। न्यायालय ने इस पर भी प्रशासन से प्रभावी कार्रवाई करने और नियमों का सख्ती से पालन कराने को कहा।
14 दिनों में कार्रवाई रिपोर्ट तलब, दो सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई...
मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय बॉम्बे हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को 14 दिनों के भीतर विस्तृत हलफनामा एवं अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। साथ ही मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की गई है, जिसमें 'एक परिवार-एक लाइसेंस' नीति, फर्जी दस्तावेजों, अपात्र लाभार्थियों तथा अन्य संबंधित मुद्दों पर आगे सुनवाई होगी।
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